Ranchi: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने अब सिर्फ परीक्षा रद्द करने की मांग तक आंदोलन को सीमित नहीं रखा है. अभ्यर्थी न्याय मंच ने सरकार की कमेटी को एक विस्तृत मांग पत्र देकर JPSC और JSSC की पूरी भर्ती व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. मंच ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी से लेकर परिणाम, नियुक्ति और परीक्षा कैलेंडर तक कई मुद्दे उठाए हैं.

मंच का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण हजारों अभ्यर्थियों का समय और अवसर दोनों प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए कुछ मामलों में तत्काल कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य की परीक्षाओं के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत है.

जिन परीक्षाओं पर सबसे ज्यादा जोर
मंच ने विज्ञापन संख्या 02/2023 के तहत हुई JSSC CGL परीक्षा रद्द कर CBI जांच कराने की मांग की है. इसी तरह 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा को भी रद्द कर पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग रखी गई है.

TDPL एजेंसी के जरिए हुई उन JPSC परीक्षाओं को भी दोबारा कराने की मांग की गई है, जिनकी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
छह महीने में दोबारा परीक्षा कराने का प्रस्ताव
मंच ने कहा है कि अगर किसी परीक्षा को रद्द किया जाता है तो उसे दोबारा कराने में वर्षों का समय नहीं लगना चाहिए. ऐसी परीक्षाओं को फास्ट ट्रैक मोड में अधिकतम छह महीने के भीतर दोबारा कराकर परिणाम जारी करने की मांग की गई है.
इसके अलावा सभी भर्ती प्रक्रियाओं को एक साल के अंदर पूरा करने और JPSC-JSSC के लिए नियमित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की गई है.
कटऑफ से लेकर नॉर्मलाइजेशन तक सब कुछ सार्वजनिक हो
अभ्यर्थी न्याय मंच ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं. मंच की मांग है कि हर परीक्षा का कटऑफ और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक किए जाएं.
अगर किसी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन लागू होता है तो उसका पूरा फार्मूला और प्रक्रिया परीक्षा परिणाम से पहले सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को किसी तरह का संदेह न रहे.
भरोसेमंद एजेंसी से परीक्षा कराने की मांग
मंच ने JSSC की भर्ती परीक्षाएं TCS जैसी प्रतिष्ठित और विश्वसनीय एजेंसी से कराने की मांग की है. इसके साथ ही JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता के कार्यकाल में आयोजित PGT, लैब असिस्टेंट, CGL समेत अन्य परीक्षाओं की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की गई है.
आयु सीमा में राहत की मांग
अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक देरी के कारण उम्र पार कर चुके या उम्र सीमा के करीब पहुंच चुके उम्मीदवारों के लिए राहत की मांग की है.
FRO और ACF भर्ती में अधिकतम उम्र की गणना के लिए 1 अगस्त 2018 को आधार तिथि मानने की मांग की गई है. आगामी JPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में भी यही आधार तिथि लागू करने की मांग है.
मंच ने JPSC परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष करने का प्रस्ताव भी दिया है.
करीब 26 हजार सहायक आचार्य पदों पर नियुक्ति जल्द हो
शिक्षक नियुक्ति को लेकर भी मंच ने सरकार का ध्यान खींचा है. सहायक आचार्य के करीब 26 हजार रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने और जिन अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हो चुका है, उनका परिणाम तत्काल जारी करने की मांग की गई है.
इसके अलावा TGT-2016 के मेधावी अभ्यर्थियों की लंबित नियुक्ति और उर्दू JTET पास अभ्यर्थियों के करीब 3,700 रिक्त पदों पर नियुक्ति जल्द कराने की मांग भी शामिल है.
पुलिस भर्ती की दौड़ में भी बदलाव का प्रस्ताव
पुलिस आरक्षी और दारोगा जैसी भर्तियों के PET को लेकर भी मंच ने सुझाव दिया है. पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1.6 किलोमीटर दौड़ का समय 7 मिनट और महिला अभ्यर्थियों के लिए 12 मिनट निर्धारित करने की मांग की गई है.
शिकायत करने वालों की पहचान गुप्त रखने की मांग
परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों और व्हिसलब्लोअर्स की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की मांग की गई है. साथ ही भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों की निगरानी के लिए एक स्थायी मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया है.
पिछले पांच वर्षों में आयोजित भर्ती परीक्षाओं के लिए कंप्लायंस सर्टिफिकेट जारी करने की मांग भी मंच ने रखी है.
अभय तिवारी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग
मांग पत्र में अभय तिवारी से जुड़े मामले को भी उठाया गया है. मंच ने JSSC CGL, PGT और 11वीं-13वीं JPSC समेत कई परीक्षाओं में उनकी सफलता से जुड़े मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की है.
इसके अलावा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित JPSC-JSSC से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए Mentioning कराकर समयबद्ध निपटारे की मांग की गई है.
भर्ती से आगे पुस्तकालय व्यवस्था पर भी जोर
अभ्यर्थी न्याय मंच ने सिर्फ भर्ती परीक्षाओं तक सीमित न रहते हुए पुस्तकालय व्यवस्था से जुड़ी मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं. मंच ने झारखंड सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम लागू करने, पुस्तकालयों से आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर नियमित नियुक्तियां करने और विश्वविद्यालयों व संस्थानों में Library and Information Science की पढ़ाई को बढ़ावा देने की मांग की है.
JET परीक्षा में Library and Information Science विषय को शामिल करने की मांग भी की गई है.
सरकार से समयबद्ध कार्रवाई की अपील
अभ्यर्थी न्याय मंच ने सरकार की कमेटी से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की है. मंच का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय की पाबंदी सुनिश्चित होने पर ही युवाओं का सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा.

