– उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने CID पूछताछ में किए कई चौंकाने वाले खुलासे
Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई धांधली और अनियमितताओं के मामले में सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं. इस मामले में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से हुई पूछताछ के बाद कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
बिना टेंडर और नियमों को ताक पर रखकर TDPL को दिया काम:
उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने स्वीकार किया है कि जेपीएससी ने बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के, केवल नामांकन के आधार पर ‘टीडीपीएल’ नामक एजेंसी को एंड-टू-एंड (शुरू से अंत तक) काम सौंप दिया था. जेपीएससी जैसी संवैधानिक और संवेदनशील संस्था को परीक्षा संचालन के लिए तय मानकों और स्थापित नियमों का पालन करना अनिवार्य था, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक का पूरा जिम्मा एक ही एजेंसी को देने के कारण कार्यों पर निगरानी रखने या ‘चेक एंड बैलेंस’ का कोई तंत्र मौजूद नहीं था.
एजेंसी के आवासीय परिसर में मिले अभ्यर्थियों के आंसर शीट:
सीआईडी की जांच और पूछताछ में सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब टीडीपीएल के लालपुर (वर्धमान कंपाउंड) स्थित आवासीय परिसर की तलाशी ली गई. सीआईडी को उस आवासीय परिसर से चार कंप्यूटर बरामद हुए. जांच में पाया गया कि इन कंप्यूटरों में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मेन्स परीक्षा के अभ्यर्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं मौजूद थीं. टीडीपीएल के कर्मचारी प्रदीप कुमार सिंह ने सीआईडी को बताया कि ये कंप्यूटर और दस्तावेज कंपनी के स्टाफ मो. उस्मान और मो. एबाद द्वारा वहां लाए गए थे. श्वेता गुप्ता ने पूछताछ में स्पष्ट किया कि परीक्षा से जुड़ा कोई भी दस्तावेज आयोग के बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होती है, फिर भी एजेंसी के कर्मचारी इसे अपने निजी व आवासीय परिसर में रखते थे.
रिजल्ट से एक महीने पहले ही मो. उस्मान को भेजा गया आंसर की:
श्वेता गुप्ता के मोबाइल फोन की जांच और पूछताछ में सीआईडी को जो साक्ष्य मिले हैं, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है. 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा 19 अप्रैल को आयोजित की गई थी और इसका परिणाम दो जुलाई को घोषित हुआ था. श्वेता गुप्ता ने रिजल्ट जारी होने से एक महीने पहले ही, यानी 26 मई को 14वीं जेपीएससी पीटी की आंसर की टीडीपीएल के कर्मचारी मो. उस्मान के व्हाट्सएप पर भेज दी थी. नियमों के अनुसार परीक्षा से संबंधित किसी भी गोपनीय और संवेदनशील दस्तावेज को इस तरह किसी बाहरी या निजी व्यक्ति को भेजना पूरी तरह से गैर-कानूनी है सीआईडी अब इन साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गई है.
