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जामताड़ा में किसानों-मजदूरों का हल्लाबोल, 300 कार्यकर्ताओं ने केंद्र के खिलाफ भरी हुंकार

Jamtara: अखिल भारतीय स्तर पर वामपंथी जन संगठनों के संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को जामताड़ा में राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन...

Jamtara: अखिल भारतीय स्तर पर वामपंथी जन संगठनों के संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को जामताड़ा में राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत किसान और मजदूर संगठनों ने प्रदर्शन किया. तालकटोरा स्टेडियम, दिल्ली में लिए गए निर्णय के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न किसान, मजदूर और खेतिहर मजदूर संगठनों के बैनर तले करीब 300 कार्यकर्ता शामिल हुए. कार्यकर्ताओं ने दोपहर 12 बजे सीपीआईएम पार्टी कार्यालय से जुलूस निकाला. जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों और बाजारों से होते हुए अनुमंडल कार्यालय पहुंचा. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की.

किसानों और मजदूरों की अनदेखी का आरोप

अनुमंडल कार्यालय के समक्ष आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर किसानों और मजदूरों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादों से पीछे हट रही है. मजदूरों के हितों को प्रभावित करने वाले लेबर कोड लागू किए गए हैं और स्थायी रोजगार के बजाय ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है. वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों और ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट बढ़ रहा है. महंगाई और कृषि लागत में लगातार वृद्धि से किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं.

कृषि को कॉरपोरेट के हवाले करने का लगाया आरोप

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां खेती को कॉरपोरेट के हवाले करने की दिशा में बढ़ रही हैं. उन्होंने किसानों की आय, कृषि लागत और ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. सभा में मनरेगा को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और रोजगार की गारंटी जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया. इसके अलावा प्रस्तावित बिजली विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को लेकर भी विरोध जताया गया.

लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवाज दबाने का आरोप

वक्ताओं ने छात्र आंदोलनों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवाज दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जन आंदोलन ही जनता की समस्याओं के समाधान का लोकतांत्रिक रास्ता है. वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से आंदोलन को और व्यापक बनाने की अपील की और किसानों, मजदूरों तथा आम लोगों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया.

कई नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में सुरजीत सिन्हा, लखनलाल मंडल, चंडीदास पुरी, मोहन मंडल, सचिन राणा, सुशांत राय, सोमालाल मिर्धा, साबिर हुसैन, मैनेसर सोरेन, सुकुमार बाउरी, देबु चौधरी, जयप्रकाश मंडल, मैना सिंह, इब्राहिम अंसारी, ममता राणा, लखी सोरेन, लखीराम मुर्मू, अशोक भंडारी, प्रवीण शरण, अशोक राणा और चंदन साधु समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं नेता मौजूद रहे.

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