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रेलवे कर्मियों की वरीयता मामला: CAT का आदेश HC ने किया रद्द, केस दोबारा ट्रिब्यूनल को भेजा

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक व कर्मचारियों की वरीयता से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश...

Jharkhand High Court
High Court grants bail to PLFI-linked Shubham Poddar, he had demanded ₹5 crore as extortion.

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक व कर्मचारियों की वरीयता से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को रद्द कर दिया है. वहीं मामला दोबारा विचार के लिए ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया है. दरअसल रेलवे ने CAT, पटना बेंच की रांची सर्किट बेंच द्वारा 17 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

क्या है मामला

रेलवे बोर्ड ने 22 फरवरी 2018 को जारी कर वाणिज्यिक विभाग की तीन श्रेणियों कॉमर्रियल क्लर्क (CC), टिकट चेकिंग(TC) और इन्क्वारी कम रिजर्ववेशन क्लर्क (ECRC) को मिला कर एकीकृत कर संयुक्त कैडर बनाने का निर्णय लिया था. इसके बाद 05 अप्रैल को 2019 को RBE No. 59/ 2019 के जरिए स्पष्ट किया गया कि 22 फरवरी 2018 तक कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता अलग-अलग रखी जाएगी. जबकि भविष्य में सीधी भर्ती से आने वाले कर्मचारियों के लिए संयुक्त वरिष्ठता लागू होगी.

इसके बाद 05 अप्रैल 2019 को आरबीइ नं.59/2018 के जरिए स्पष्ट किया गया कि 22 फरवरी 2018 तक कार्यरत कर्मचारियों की वरीयता अलग-अलग रखी जाएगी. जबकि भविष्य में सीधी भर्ती से आने वाले कर्मचारियों के लिए संयुक्त वरीयता लागू होगी.
मामले में शामिल कर्मचारी 22 फरवरी 2018 से पहले रेलवे के विभिन्न डिवीजनों में टिकट परीक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे. बाद में वर्ष 2022 में उन्होंने अपनी इच्छा से इंटर-डिवीजन ट्रांसफर लेकर धनबाद डिवीजन में योगदान दिया. रेलवे ने उन्हें डायरेक्ट रिक्रूटमेंट कोटे की रिक्तियों के विरुद्ध स्थानांतरित मानते हुए संयुक्त कैडर की वरीयता सूची में शामिल कर दिया.
धनबाद डिवीजन ने 9 फरवरी को संयुक्त वरीयता सूची जारी की. इससे असंतुष्ट कर्मचारियों ने CAT में याचिका दायर की. CAT ने 17 दिसंबर 2025 को वरीयता सूची रद्द करते हुए संबंधित कर्मचारियों के लिए अलग वरीयता सूची जारी करने का निर्देश दिया था.

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हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने कहा कि 08 फरवरी 2018 को रेलवे के महाप्रबंधक, हाजीपुर की ओर से जारी स्पष्टीकरण में साफ किया गया था कि 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से दूसरे डिवीजन में स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता यूनिफाइड/मर्ज्ड कैडर में निर्धारित की जाएगी.

खंडपीठ ने माना कि संबंधित कर्मचारी 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से धनबाद डिवीजन में स्थानांतरित होकर आए थे, इसलिए उनकी वरिष्ठता संयुक्त कैडर में रखना रेलवे के 08 फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण के अनुरूप था.22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से धनबाद डिवीजन में स्थानांतरित होकर आए थे, इसलिए उनकी वरिष्ठता संयुक्त कैडर में रखना रेलवे के 08 फरवरी 2023 के अनुरुप था.ऐसे में 09 फरवरी 2023 की वरीयता सूची को रद्द करने का CAT का फैसला उचित नहीं था. कोर्ट ने रेलवे की रिट याचिका को निष्पादित कर दिया.

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