Saraikela: सरायकेला खरसावां जिले के कुकड़ु प्रखंड के सपादा गाँव में आँगनबाड़ी केंद्र का भवन नहीं बन पाया है. पिछले 12 सालों से बच्चे कभी काजू तो कभी कटहल के पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. सेविका-सहायिका बताती हैं कि 12 साल से वे आवासों या पेड़ों के नीचे बच्चों को पढ़ा रही हैं. तीन साल पहले भवन निर्माण शुरू हुआ, पर अब भी अधूरा ही है. ब्लॉक की लेडी सुपरवाइजर को इस संबंध में कई बार सूचना दी गई, पर कार्रवाई नहीं हुई. अभिभावक ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों से डर कर खुले में अपने बच्चे को भेजने से कतराते हैं. सड़क किनारे धूलों के बीच पढ़ाई होती है. सेविका के बाहर जाने पर बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है.


क्या ऐसे संवरेगा नौनिहालों का भविष्य?
आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका ने कहा कि पिछले 12 साल से हमलोग बच्चों को इसी तरह पढ़ा रहे हैं. कभी किसी के आवास में तो कभी किसी पेड़ के नीचे पढ़ाते पढ़ाते हैं. आंगनबाड़ी केंद्र का भवन अभीतक नहीं बना, जिससे परेशानी होती है.

