Hazaribagh/Charhi: चरही स्थित तापीन साउथ के सीसीएल क्लब हॉल में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) हजारीबाग जिला समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने की, जबकि संचालन जिला सचिव नीलकंठ महतो ने किया. बैठक में झामुमो के केंद्रीय महासचिव फागू बेसरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर विस्तार से चर्चा हुई.
खनिज संपदा पर जनता के अधिकार की बात
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय महासचिव फागू बेसरा ने कहा कि यह विधेयक झारखंड सहित खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने वाला है. उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाला कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकारों में कटौती करने का प्रयास कर रही है.फागू बेसरा ने कहा कि झारखंड की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां की जनता का है. यदि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास करेगी तो झामुमो इसका पुरजोर विरोध करेगा.
राज्य की आर्थिक स्वायत्तता प्रभावित होने का आरोप
फागू बेसरा ने कहा कि झारखंड सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाएं खनिज संसाधनों से प्राप्त राजस्व पर निर्भर हैं. ऐसे में उनके अनुसार यह विधेयक राज्य की आर्थिक स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है. इसका असर गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और वंचित वर्गों पर पड़ने की आशंका है.उन्होंने कहा कि झामुमो राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा.
संजीव बेदिया बोले, झारखंड कोई उपनिवेश नहीं
जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि झारखंड कोई उपनिवेश नहीं है, जहां के संसाधनों पर दिल्ली में बैठकर निर्णय लिया जाए. उन्होंने कहा कि झारखंड लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद अस्तित्व में आया है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक झारखंड की जनता का है.उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड के संसाधनों का दोहन करना चाहती है, लेकिन राज्य को उसका अधिकार और हिस्सेदारी देने में संकोच करती है. बेदिया ने कहा कि संशोधन के कारण राज्य के राजस्व पर असर पड़ा तो इसका प्रभाव मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है.
विधेयक को बताया काला कानून
जिला सचिव नीलकंठ महतो ने कहा कि विधेयक से राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इससे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होने की आशंका है. बैठक में मौजूद झामुमो नेताओं ने सर्वसम्मति से विधेयक की आलोचना करते हुए इसे “काला कानून” बताया. नेताओं ने केंद्र सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की. साथ ही झारखंड के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने का संकल्प लिया.
संगठन मजबूती और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा
बैठक में संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क अभियान चलाने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हुई. इस अवसर पर केंद्रीय सदस्य राजकुमार महतो, गौरव पटेल, इजहार अंसारी, विकास राणा, यासीन खान, राम किशोर मुर्मू, युवा मोर्चा उपाध्यक्ष पीयूष बेदिया, जिला प्रवक्ता सतीश नारायण दास, कुणाल यादव, जिला उपाध्यक्ष दीपक राय, रामकिशोर महतो, मोहन सोरेन, सह सचिव राजदेव यादव, लखीराम मांझी, कोषाध्यक्ष मो. अख्तर, संगठन सचिव राजलाल महतो, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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