युवाओं का इम्तिहान : JPSC और JSSC की परीक्षाओं में धांधली के मामले एक-दूसरे के साथ कर रहे कदमताल, पढ़िए पूरी रिर्पोट

Ranchi : राज्य की दो सबसे बड़ी चयन संस्थाएं झारखंड लोक सेवा आयोग JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC आज अपने...

JPSC और JSSC

Ranchi : राज्य की दो सबसे बड़ी चयन संस्थाएं झारखंड लोक सेवा आयोग JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC आज अपने इतिहास के सबसे भीषण और गहरे भरोसे के संकट से गुजर रही है. एक तरफ जहां जेपीएससी JPSC की पुरानी 11 नियुक्ति परीक्षाओं की जांच सीबीआई CBI के शिकंजे में है. वहीं, दूसरी तरफ हालिया परिणामों में सामने आई कथित अनियमितताओं, ओएमआर OMR शीट के फर्जीवाड़े और जेएसएससी-सीजीएल JSSC-CGL पेपर लीक कांड जैसे कारनामों ने झारखंड के लाखों युवाओं के सपनों को झकझोर कर रख दिया.

JPSC का काला इतिहास : CBI जांच के घेरे में पुरानी नियुक्तियां

पिछले करीब दो दशकों में जेपीएससी JPSC की कार्यप्रणाली लगातार संदेह के दायरे में रही है. आयोग की 11 प्रमुख नियुक्तियां ऐसी हैं जो अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के चलते जांच एजेंसियों और अदालतों के कटघरे में खड़ी हैं. भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शुरुआत तत्कालीन राज्य निगरानी ब्यूरो की प्राथमिक जांच से हुई थी. जांच के दौरान मेरिट सूची में फेरबदल, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, प्राप्तांक बढ़ाने और चयन प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करने जैसे काले कारनामे उजागर हुए. बुद्धदेव उरांव सहित अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने इन आरोपों को बेहद गंभीर माना और पहली तथा दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित कई मामलों की जांच सीबीआई CBI को सौंप दी.

पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में 107 आरोपी

सीबीआई CBI ने वर्ष 2012 में इस मामले में जांच शुरू की थी. लंबी कानूनी और तकनीकी पड़ताल के बाद, जांच शुरू होने के करीब 12 वर्षों के अंतराल पर एजेंसी ने दोनों मामलों में अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की. पहली सिविल सेवा परीक्षा में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद, आयोग के सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक समेत कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया गया. वहीं, दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के मामले में 70 लोगों को आरोपी बनाया गया.

हालिया विवाद और 14वीं PT व बैकलॉग परीक्षा का कथित फर्जीवाड़ा

पुरानी जांचों के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि हाल ही में आयोजित की गई आधा दर्जन नई नियुक्ति परीक्षाएं भी भारी विवादों के घेरे में आ गई हैं. जेपीएससी JPSC की 14वीं सिविल सेवा पीटी PT रिजल्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद जेपीएससी JPSC  बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के रिजल्ट में भी कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है. सीआईडी CID के समक्ष इस परीक्षा से जुड़ी एक केंद्र की ओएमआर OMR शीट पेश की गई. जिसमें एक अभ्यर्थी ने 100 में से महज 32 सवालों के जवाब दिए थे. जब इसकी प्रिलिमिनरी आंसर की से मिलान की गई, तो महज 15 जवाब ही सही निकले, जबकि 17 जवाब गलत पाए गए. इसके बावजूद, छह जुलाई को जारी किए गए आधिकारिक रिजल्ट में उस अभ्यर्थी को उत्तरीण घोषित कर दिया गया. इतने कम और नकारात्मक मार्किंग के करीब रहने वाले सही उत्तरों के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी का पास होना पूरी तरह असंभव था.

परीक्षाओं पर रोक और नया भूचाल

इस कथित फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद जेपीएससी JPSC ने 14वीं पीटी PT के साथ-साथ बैकलॉग प्रतियोगिता की मुख्य परीक्षा पर भी रोक लगा दी है. यह मुख्य परीक्षा एक, दो और तीन अगस्त को आयोजित होनी थी. ठीक इसी तरह, 14वीं पीटी PT में भी ओएमआर OMR शीट सामने आने के बाद ही इस बड़े कथित फर्जीवाड़े की परतें खुली थी.

UP विवाद वाली संदिग्ध एजेंसी का साया और परीक्षा प्रणाली पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश की उन विवादास्पद प्रतियोगी परीक्षाओं का हवाला दिया. जिनका रिकॉर्ड दागदार रहा है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस एजेंसी को झारखंड में इतनी संवेदनशील जिम्मेदारियों के संचालन की कमान सौंपी गई है, उसका नाम पहले भी यूपी UP भर्ती परीक्षाओं के विवादों में आ चुका है. इस बात को लेकर कड़ी आपत्ति जताई जा रही है कि वन टाइम रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन आवेदन, एडमिट कार्ड जारी करना, प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, ओएमआर OMR एवं उत्तर पुस्तिका की प्रिंटिंग, ओएमआर OMR स्कैनिंग, ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसी पूरी परीक्षा श्रृंखला एक ही एजेंसी के नियंत्रण में क्यों है? इसके अलावा कट-ऑफ अंक सार्वजनिक न करना और सदस्यों द्वारा परिणामों पर विधिवत हस्ताक्षर न करना जैसी बातें इस पूरी व्यवस्था को और संदिग्ध बनाती हैं. इसी आधार पर अब स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट और एजेंसी चयन प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है.

अफसरों के परिजनों के चयन की सुगबुगाहट

इन तमाम विवादों के बीच प्रतियोगी छात्र समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा आग की तरह फैल रहा है कि कई वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के बेटे-बेटियों और करीबी रिश्तेदारों का भी चयन इन परीक्षाओं में हुआ है. इस चर्चा ने अभ्यर्थियों के गुस्से को और भड़का दिया है. जो अब खुलकर सड़कों पर आकर पूरी चयन प्रक्रिया की न्यायिक व स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं.

JSSC : पेपर लीक से लेकर एडमिट कार्ड के संकट तक

जिस प्रकार जेपीएससी JPSC अपनी परीक्षाओं की विश्वसनीयता खो चुका है, ठीक उसी बदहाली के दौर से झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC भी गुजर रहा है. जेएसएससी JSSC की प्रमुख विवादित परीक्षाओं के हालिया कारनामों ने सिस्टम की कलई खोलकर रख दी है.

JSSC-CGL परीक्षा (2024) : पेपर लीक का काला साया

सितंबर 2024 में आयोजित इस प्रतिष्ठित स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक होने का गंभीर और पुख्ता आरोप लगा था. राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में छात्रों का जनसैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा था. उग्र प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज और तीव्र राजनीतिक बवाल के बाद आखिरकार यह मामला झारखंड उच्च न्यायालय और उच्चस्तरीय जांच समितियों के दायरे में आ गया. जिससे आयोग की साख को करारा झटका लगा.

फील्ड वर्कर / क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा (जुलाई 2026)

19 जुलाई 2026 को आयोजित इस परीक्षा में स्थिति यह थी कि इस परीक्षा में लगभग 75% अभ्यर्थी शामिल ही नहीं हो पाए. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह था कि दूर-दराज के उम्मीदवारों को उनके गृह जिलों से 300 से 550 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए थे. हद तो तब हो गई जब कई छात्रों को उनके एडमिट कार्ड परीक्षा शुरू होने के दौरान या फिर परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन ईमेल पर प्राप्त हुआ. इसके अलावा, संताली भाषा के प्रश्नपत्र में आउट-ऑफ-सिलेबस और भारी त्रुटिपूर्ण सवाल पूछे जाने की शिकायतों ने इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया को मजाक बनाकर रख दिया.

सचिवालय आशुलिपिक परीक्षा (2024-2026) : उम्मीदों पर फिरा पानी

इस परीक्षा का विज्ञापन जारी होने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद, कार्मिक विभाग की ओर से अचानक इसका नियुक्ति प्रस्ताव वापस ले लिया गया. इसके परिणामस्वरूप आयोग को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना पड़ा. जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों के हाथ केवल निराशा और हताशा ही लगी.

इन परीक्षाओं की CBI कर रही जांच

• प्रथम संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा

• द्वितीय संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा

• सहायक एवं कनीय अभियंता नियुक्ति परीक्षा

• विश्वविद्यालय डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्ति परीक्षा

• व्याख्याता नियुक्ति परीक्षा

• झारखंड पात्रता परीक्षा

• प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा

• प्रथम सीमित सिविल सेवा परीक्षा

• सहकारिता सेवा परीक्षा

• चिकित्सक नियुक्ति परीक्षा

• बाजार पर्यवेक्षक नियुक्ति परीक्षा

जिन नई परीक्षाओं पर उठे गंभीर सवाल

• झारखंड स्वास्थ्य सेवा संयुक्त नियुक्ति परीक्षा (बेसिक) (04/2023)

• झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा (बेसिक) (04/2024)

• झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (01/2026)

• झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (05/2026)

• झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (06/2026)

प्रमुख अनियमितताएं जो उजागर हुईं

• मेरिट लिस्ट में हेरफेर : योग्य उम्मीदवारों को बाहर करने के लिए सूची में सुनियोजित बदलाव किए गए.

• उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ : कॉपियों के बंडल बदलकर अंकों में हेरफेर किया गया.

• प्राप्तांक बढ़ाने के आरोप : अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराने के लिए उनके अंकों को रातों-रात बढ़ाया गया.

• प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ : आयोग के पदाधिकारियों, सत्ता के गलियारों के रसूखदारों और रसूखदार रिश्तेदारों को गुप्त रूप से अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

• मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव : कॉपियों की जांच और मूल्यांकन के तमाम मानकों को ताक पर रख दिया गया.

ALSO READ : EXCLUSIVE : ह्यूमन इंटेलिजेंस रिपोर्ट- TPC और JJMP संगठन के चार दस्ते में बचे रविकांत व नथुनी समेत नौ उग्रवादी, जाने कौन कहां है सक्रिय

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *