Ranchi: JPSC-JSSC विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच रांची में हुए स्याही प्रकरण ने छात्र संगठनों के बीच सियासी टकराव बढ़ा दिया है. अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने AISA पर तीखा हमला बोला है. ABVP ने आरोप लगाया कि AISA छात्र हित के मुद्दों को पीछे धकेलकर रांची की घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है. ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि छात्र आंदोलनों को राजनीतिक प्रचार का हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके मुताबिक, JPSC-JSSC जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब और पारदर्शी जांच की मांग होनी चाहिए, लेकिन स्याही प्रकरण को लेकर बिना तथ्य आरोप लगाकर माहौल बिगाड़ना उचित नहीं है.
स्याही कांड को बनाया जा रहा राजनीतिक हथियार
डॉ. सोलंकी ने कहा कि रांची की घटना को लेकर ऐसा नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, जिससे मूल विद्यार्थी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटे. उन्होंने कहा कि किसी घटना की जांच जरूरी है तो वह निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत किसी संगठन को कटघरे में खड़ा करना केवल राजनीतिक हताशा दिखाता है. ABVP ने कहा कि छात्र राजनीति का केंद्र परीक्षा, रोजगार, शिक्षा और विद्यार्थियों के अधिकार होने चाहिए. इन मुद्दों को छोड़कर आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देना छात्र हित में नहीं है.

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परिसरों को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनने देंगे
ABVP ने AISA पर आरोप लगाया कि वह छात्र आंदोलनों को एक खास राजनीतिक विचारधारा के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है. संगठन ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को वैचारिक टकराव और राजनीतिक संघर्ष का मैदान बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा. डॉ. सोलंकी ने कहा कि “विद्यार्थी आंदोलन राष्ट्र निर्माण की ताकत हैं, राजनीतिक नौटंकी का मंच नहीं.” उन्होंने कहा कि छात्र समाज ऐसे प्रयासों को पहले भी खारिज करता रहा है और आगे भी विद्यार्थी हित तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर मजबूती से खड़ा रहेगा.

