Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है. छात्र नेता चंदन सिंह ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय के पिछले दो वर्षों के कार्यों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से गंभीर अनियमितताएं जारी हैं, लेकिन लगातार शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद अब तक किसी भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है.

परीक्षा शुल्क में गड़बड़ी का बड़ा आरोप
छात्र नेता ने आरोप लगाया कि हजारों विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा फॉर्म भरने के लिए जमा की गई राशि विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं हुई. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति भी गठित की गई थी, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि यह मामला विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है और करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका को जन्म देता है.
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कोरोना काल के बाद अधिकांश शैक्षणिक प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं, इसके बावजूद विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है. ऑनलाइन प्रवेश पत्र उपलब्ध कराने के बावजूद छात्रों से अलग से शुल्क वसूले जाने और निजी कंपनियों को भुगतान किए जाने पर भी सवाल उठाए गए है. आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता हुई हो सकती है.
नामांकन शुल्क और योजनाओं के खर्च की जांच की मांग
छात्र नेता ने कुलाधिपति पोर्टल के माध्यम से लिए जा रहे नामांकन शुल्क की भी जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा प्रधानमंत्री-उषा योजना के तहत खर्च की गई राशि और उससे जुड़े कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है. ज्ञापन में कहा गया है कि जिन अधिकारियों पर पहले वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपना कई सवाल खड़े करता है.
ज्ञापन में विशेष रूप से पूर्व कुलपति मुकुल नारायण देव के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस दौरान जिन अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे और जिनके खिलाफ लाखों रुपये की वसूली का आदेश जारी हुआ था, उन मामलों में आज तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. साथ ही मिथलेश सिंह की पदोन्नति और झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 लागू होने के बाद कुलसचिव पद से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों की भी जांच की मांग की गई है.
छात्र सुविधाओं का भी गंभीर अभाव
चंदन सिंह ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए स्वच्छ पेयजल, शौचालय, छात्रावास, वाई-फाई और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. उन्होंने कहा कि खराब व्यवस्थाओं के कारण छात्रों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है और उच्च शिक्षा व्यवस्था की छवि धूमिल हो रही है.
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
छात्र नेता ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालय में बीते दो वर्षों के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र मोर्चा लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होगा.
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