रांची: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको शिखर पर पहुंचने से नहीं रोक सकती. इस बात को सच कर दिखाया है बिहार के नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के रहने वाले रविराज ने. रविराज ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 20वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है.
बाधाओं को बनाया अपनी ताकत:
दृष्टिबाधित होने के बावजूद रविराज ने कभी भी अपनी इस शारीरिक चुनौती को अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने दिया.उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता का रास्ता आंखों की रोशनी से नहीं, बल्कि मन की एकाग्रता और कड़ी मेहनत से तय होता है.उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से न केवल उनके गाँव महुली में, बल्कि पूरे नवादा जिले और बिहार राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है.
किसान के बेटे ने लहराया परचम:
एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रविराज की यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है. इससे पहले भी वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. यूपीएससी से पहले उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया था.वे बीपीएससी परीक्षा में न केवल सफल हुए, बल्कि राजस्व अधिकारी के पद पर चयनित होकर जिला टॉपर भी रहे.
