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झारखंड में एनुअल हेल्थ चेकअप एक्ट बनाया जाए : जयराम महतो

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में एनुअल हेल्थ चेकअप एक्ट बनाया जाना...

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में एनुअल हेल्थ चेकअप एक्ट बनाया जाना चाहिए, जिससे कि राज्य के नागरिकों को लीगल राइड मिल सके. उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति असहाय हो गई है. झारखंड में 7500 लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर है. एक लाख पर सिर्फ एक विशेषज्ञ डॉक्टर है. आज झारखंड में 22,500 डॉक्टरों की जरूरत है. इस मानक को पूरा करने में 50 साल लगेंगे. जीएसडीपी का सिर्फ एक फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च होता है.

झारखंड में प्राइवेट हेल्थ केयर का मार्केट 12 हजार करोड़ का : जयराम

जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में प्राइवेट हेल्थ केयर का मार्केट 12 हजार करोड़ का हो गया है. आइएएस पूजा सिंघल का हेल्थ प्वाइंट हॉस्पीटल चल रहा है. राज्य के कई सचिव स्तर के अफसरों के निजी भवन में हॉस्पीटल चल रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री को स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल जानने के लिए जापान, स्वीडन और जर्मनी का दौरा करना चाहिए. जयराम महतो ने कहा कि राज्य में नर्स के 3033 पद खाली है. 100 रोड एक्सीडेंट में 72 युवाओ की मौत होती है. प्रतिदिन 10 से 12 युवाओ की मौत रोड एक्सीडेंट में हो रही है. राज्यकर्मियों की बीमा योजना उनके हित में नहीं है. हर साल कार्ड बनाना पड़ रहा है. रिम्स टू का मामला निष्कर्ष के धरातल पर लेकर आएं. प्रमंडलवार रिम्स की जरूरत है. राज्य में मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना होनी चाहिए. घोषणा के अनुसार धान की कीमत दी जाए.

असामाजिक तत्वों ने रिम्स टू का किया विरोध : हेमलाल

वहीं हेमलाल मुर्मू ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि रिम्स ओवर लोडेड हो गया है. इसलिए रिम्स टू जरूरी है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने इसका विरोध किया. कुछ लोगों को सरकार के काम से एलर्जी हो गया है. ओल्ड एज होम की स्थापना सभी जिलों में होनी चाहिए. लंबित योजनाओ का कार्यान्वयन के साथ निगरानी भी होनी चाहिए. हॉस्पीटल में रिक्तियों को भरा जाए. डॉक्टर को छड़ी दिखाकर काम नहीं कराया जा सकता. आदेश पारित होने से पहले कानून का सम्यक अध्ययन होना चाहिए. रिम्स का 252 करोड़ खर्च नहीं हुआ. न्यूक्लियर मेडिसीन और रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है. फैकल्टी के बिना डॉक्टर पैदा नहीं कर सकते. इसके लिए कमेटी बनाई जाए. फूड सेफ्टी अफसर और फूड टेस्टिंग लैब होना चाहिए. एंबुलेंस की व्यवस्था ठीक होनी चाहिए. प्राइवेट हॉस्पीटल के लिए एक रेगुलेटरी ऑथिरिटी बनाई जाए.

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