Hazaribagh: शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित सब्जी बाजार में इन दिनों ठेकेदार की कथित तानाशाही और अनाप-शनाप वसूली को लेकर चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है. सुबह से शाम तक पसीना बहाकर चंद पैसे कमाने वाले छोटे और गरीब सब्जी विक्रेताओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया. इस मनमानी लूट के विरोध में दर्जनों दुकानदार रविवार को एकजुट होकर उपमहापौर अविनाश कुमार यादव के पास गुहार लगाने पहुंचे. दुकानदारों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इसी तरह उनसे नाजायज वसूली होती रही, तो उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.
₹37 लाख का टेंडर और गरीबों पर हर महीने ₹4500 का बोझ
गौरतलब है कि हाल ही में इस सब्जी मंडी की डाक लगभग 37 लाख रुपये में हुई है, जिसके बाद से ठेकेदार ने यहां वसूली का खेल शुरू कर दिया है. इस मंडी में न तो पक्की दीवारें हैं, न शटर हैं, न बिजली की सुविधा है और न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था. इसके बावजूद मंडी के भीतर शेड में बैठने वाले गरीब विक्रेताओं से रोजाना 150 रुपये (यानी करीब 4500 रुपये महीना) की भारी-भरकम वसूली की जा रही है. शहर की पक्की दुकानों का किराया भी इतना नहीं है, जितना इस खुले आसमान के नीचे शेड का वसूला जा रहा है.

छोटी बोरी और टोकरी लेकर आने वाले ग्रामीणों को भी नहीं बख्शा
मंडी के भीतर शेड वालों की कमर तो टूट ही रही है, बाहर सड़क किनारे बैठने वाले छोटे दुकानदारों और ग्रामीण किसानों को भी बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है. नगर निगम के नियमानुसार जहां 50 किलो की बोरी पर महज 15 रुपये की वसूली तय होनी चाहिए, वहां ठेकेदार के करिंदे महज 15 किलो की छोटी बोरी और टोकरी पर ही 50-50 रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं. ग्रामीण स्तर पर दो टोकरी लेकर बैठने वालों से सीधे 40 से 50 रुपये ऐंठ लिए जाते हैं. दुकानदारों ने रोते हुए बताया कि उनकी कुल दैनिक कमाई ही इतनी नहीं होती, जितना ठेकेदार वसूल लेता है.
“सड़क पर नहीं, बाजार के अंदर ही बेचेंगे सब्जी मगर लूट बंद हो”
डिप्टी मेयर से वार्ता के दौरान दुकानदारों ने एक बड़ा और सकारात्मक फैसला लेते हुए कहा कि वे शहर की यातायात व्यवस्था को बिगाड़कर सड़क पर दुकान लगाने के हक में बिल्कुल नहीं हैं. वे सभी आज से ही सड़क खाली करने को तैयार हैं और पुराना बस स्टैंड परिसर (स्टेडियम मंडी) के अंदर ही अपनी दुकानें सजाएंगे. लेकिन उनकी सिर्फ एक ही शर्त है कि बाजार के भीतर ठेकेदार की यह मनमानी और अवैध वसूली तुरंत रोकी जाए और जो उचित सरकारी शुल्क है, वही लिया जाए.
डिप्टी मेयर का ऐतिहासिक वादा: अगले मार्च से पूरी मंडी होगी ‘टैक्स फ्री‘
दुकानदारों की इस सकारात्मक पहल और एकजुटता को देखकर उपमहापौर अविनाश कुमार यादव ने भी मौके पर एक बेहद राहत भरा और बड़ा ऐलान कर दिया. उन्होंने दुकानदारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि नगर निगम सिर्फ इसलिए वसूली प्रक्रिया अपनाता है ताकि लोग सड़कों को जाम न करें और व्यवस्थित होकर आवंटित बाजारों के भीतर बैठें. उन्होंने वादा किया कि यदि आप सभी दुकानदार खुद जिम्मेदारी लेते हुए सड़क छोड़कर बाजार के अंदर दुकान लगाने को तैयार हैं, तो आने वाले साल यानी मार्च 2027 में इस बाजार की ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी दुकानदार को नगर निगम या किसी ठेकेदार को एक भी रुपया किराया नहीं देना पड़ेगा और सभी बिल्कुल मुफ्त में अपना व्यापार कर सकेंगे. हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि इसके बाद भी कोई सड़क पर खरीद-बिक्री करेगा, तो निगम और ठेकेदार दोनों मिलकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करेंगे.
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