Bermo: सीसीएल बीएंडके (बोकारो-करगली) एरिया अंतर्गत कारो स्पेशल फेज-दो मेगा ओपनकास्ट कोयला परियोजना में बड़वाबेड़ा गांव का पुनर्वास कार्य पिछले दो वर्षों से अधर में लटका हुआ है. गांव के नीचे लगभग 40 लाख टन उच्च गुणवत्ता वाला कोयला भंडार मौजूद है, जिसके कारण परियोजना का विस्तार और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
पुनर्वास नहीं होने से उत्पादन पर असर
बड़वाबेड़ा गांव को हटाए बिना कोयला उत्खनन संभव नहीं माना जा रहा है. परियोजना क्षेत्र में खनन और ब्लास्टिंग कार्यों के चलते ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. सीसीएल प्रबंधन का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया बाधित रहने से उत्पादन ठप होने और कोल इंडिया को बड़े राजस्व नुकसान की आशंका है.
दो वर्षों से जारी है विरोध प्रदर्शन
चिह्नित पुनर्वास स्थल पर गोविंदपुर, राजा बाजार, नयी बस्ती और नूरी नगर के विस्थापितों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है. आंदोलन के कारण परियोजना की शुरुआत समय पर नहीं हो सकी है. हाल ही में प्रशासन और सीसीएल की टीम जेसीबी मशीनों के साथ स्थल पर पहुंची थी, लेकिन विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे ग्रामीणों ने विरोध करते हुए कार्य रोक दिया.
पुनर्वास योजना का दावा
सीसीएल के अनुसार बड़वाबेड़ा गांव के परिवारों को चरणबद्ध तरीके से नए पुनर्वास स्थल पर बसाने की योजना है. प्रत्येक परिवार को पांच डिसमिल जमीन, मुआवजा, रोजगार के अवसर तथा सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं देने की बात कही गई है. पुनर्वास स्थल पर चारदीवारी निर्माण भी पूरा कर लिया गया है.
विस्थापितों ने उठाए मुआवजा और रोजगार के सवाल
विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें जमीन के बदले नियमानुसार रोजगार और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला. उनका कहना है कि यदि रोजगार नहीं दिया जा सकता तो अधिग्रहित जमीन वापस की जाए. इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने विवादित जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर सामूहिक जुताई भी की थी.

वार्ताएं बेनतीजा, दोनों पक्ष आमने-सामने
प्रशासन, सीसीएल प्रबंधन और विस्थापितों के बीच कई दौर की त्रिपक्षीय वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सर्वमान्य समाधान नहीं निकल पाया है. सीसीएल प्रबंधन का दावा है कि जमीन 40-45 वर्षों से अधिग्रहित है और पूर्व समझौतों के तहत मुआवजा व नियोजन दिया जा चुका है.
कानूनी कार्रवाई भी शुरू
सीसीएल ने सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में चार विस्थापितों के खिलाफ बोकारो थर्मल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. वहीं विस्थापितों ने भी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदन दिया है. दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद के कारण कारो स्पेशल फेज-दो परियोजना फिलहाल पूरी तरह से अधर में लटकी हुई है.
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