विनीत आभा उपाध्याय
RANCHI: झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव की मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो तस्वीर सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली है. झारखंड हाईकोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता महेश तिवारी ने चुनावी मैदान में शानदार प्रदर्शन किया और मतों की गिनती के आधार पर उन्होंने जीत की दहलीज पार कर ली थी.
कानूनी पेच ने रोका रास्ता
लेकिन जीत के जश्न से पहले ही कानूनी पेच ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.मतगणना के रुझानों और अंतिम आंकड़ों के मुताबिक महेश तिवारी निर्वाचित होने के लिए पर्याप्त वोट हासिल कर चुके थे.लेकिन चुनाव परिणाम की घोषणा के वक्त काउंसिल ने उनके निर्वाचन पर रोक लगा दी.इसका मुख्य कारण एक पुराना आपराधिक मामला बना जिसमें हाल ही में उन्हें दोषी करार दिया गया है.
महिला वकील से दुर्व्यवहार मामले में दोषसिद्धि पड़ी भारी
महेश तिवारी पर एक महिला वकील के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने का आरोप था.इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया.बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक, यदि कोई प्रत्याशी किसी गंभीर आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है, तो वह पद के लिए अयोग्य हो जाता है.महेश तिवारी के दोषी करार दिए जाने के कारण निर्वाचन समिति ने कड़ा रुख अपनाया.नियमों का पालन करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनके स्थान पर उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रयाग महतो को निर्वाचित घोषित कर दिया गया.अधिवक्ताओं के बीच यह मामला नजीर बन गया है.
चर्चा है कि महेश तिवारी ने वोट तो हासिल कर लिए लेकिन नैतिक और कानूनी आधार पर वे अपनी सीट नहीं बचा पाए.राज्य के इतिहास में यह संभवतः पहला ऐसा मामला है जहां मतों की गिनती में जीतने के बावजूद किसी प्रत्याशी को इस तरह बाहर का रास्ता देखना पड़ा हो.फिलहाल प्रयाग महतो के निर्वाचन के बाद उनके समर्थकों में उत्साह है वहीं इस फैसले ने भावी प्रत्याशियों के लिए एक कड़ा संदेश भी दिया है कि डिग्री और वोट ही काफी नहीं बेदाग छवि भी अनिवार्य है.
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