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सावधान! WhatsApp पर आया शादी का कार्ड कर सकता है कंगाल, डिजिटल निमंत्रण के नाम पर साइबर ठगी का नया तरीका

Ajay Dayal Ranchi: शादी के सीजन में WhatsApp पर डिजिटल निमंत्रण (e-card) भेजने का चलन तेजी से बढ़ा है. इसी का फायदा...

cyber fraud
Beware! A wedding card received on WhatsApp could leave you penniless

Ajay Dayal

Ranchi: शादी के सीजन में WhatsApp पर डिजिटल निमंत्रण (e-card) भेजने का चलन तेजी से बढ़ा है. इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं. साइबर ठग शादी के कार्ड के नाम पर वायरस वाली फाइल भेजकर मोबाइल हैक कर रहे हैं और बैंक खातों से रकम उड़ा रहे हैं.

साइबर अपराधी पहले किसी व्यक्ति का मोबाइल या व्हाट्सएप अकाउंट हैक करते हैं. इसके बाद उसी नंबर से उसके परिचितों को शादी का निमंत्रण भेजते हैं. यह फाइल देखने में सामान्य PDF या फोटो जैसी लगती है, लेकिन वास्तव में यह APK फाइल होती है.

ऐसे होता है साइबर ठगी का खेल

जैसे ही कोई व्यक्ति उत्सुकतावश APK फाइल डाउनलोड करता है, उसके मोबाइल में एक जासूसी ऐप इंस्टॉल हो जाता है. इसके बाद साइबर अपराधियों को फोन के मैसेज, कॉन्टैक्ट, गैलरी, OTP और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच मिल जाती है. इसके जरिए वे बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं.

रांची में सामने आए मामले

रांची के अपर बाजार स्थित महावीर चौक के कपड़ा व्यवसायी अनीस कुमार के मोबाइल से साइबर अपराधियों ने शादी के डिजिटल कार्ड भेजने शुरू कर दिए. परिचितों से जानकारी मिलने के बाद उन्हें पता चला कि उनका फोन हैक हो गया है. इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल फॉर्मेट कराया और सिम भी बदल लिया.

इसी तरह कई पत्रकारों को भी डिजिटल निमंत्रण कार्ड भेजकर ठगी का प्रयास किया गया. जागरूकता के कारण अधिकांश लोगों ने APK फाइल नहीं खोली और ठगी से बच गए, हालांकि कुछ लोगों ने परिचित का नंबर समझकर फाइल खोल दी.

ऐसे रहें सुरक्षित

– किसी भी शादी के कार्ड को खोलने से पहले देखें कि फाइल .pdf है या .apk. यदि फाइल के अंत में .apk लिखा हो तो उसे तुरंत डिलीट कर दें.
– अनजान नंबर से आई किसी भी फाइल, लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें.
– यदि परिचित के नंबर से भी ऐसा कार्ड आए, तो पहले फोन कर उसकी पुष्टि कर लें.
– मोबाइल की सेटिंग्स में Install unknown apps या Unknown sources का विकल्प हमेशा बंद रखें.
– यदि गलती से APK फाइल डाउनलोड हो जाए या साइबर ठगी का शिकार हो जाएं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाना अथवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं.

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