Ranchi: झारखंड सरकार ने खूंटी जिले के स्वास्थ्य ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने 130 बेड वाले खूंटी जिला अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अपग्रेड कर अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और टीचिंग हॉस्पिटल में बदलने का पूरा खाका तैयार कर लिया है. 60 वर्षों की लीज पर बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य आदिवासी बहुल इलाके में विश्वस्तरीय इलाज और मेडिकल शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना है.
हर साल 50 MBBS छात्रों को मिलेगा दाखिला
इस परियोजना के तहत मौजूदा 130 बेड वाले अस्पताल, जिसमें 100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 30 बेड का मदर एंड चाइल्ड हेल्थ ब्लॉक शामिल है, को बढ़ाकर कम से कम 220 बेड का आधुनिक शिक्षण अस्पताल बनाया जाएगा. इसके साथ ही यहां हर साल 50 एमबीबीएस सीटों की क्षमता वाला मेडिकल कॉलेज स्थापित होगा। कुल 20.86 एकड़ भूमि में यह पूरा परिसर विकसित किया जाएगा, जिसमें 5.86 एकड़ में वर्तमान अस्पताल और शेष 15 एकड़ में मेडिकल कॉलेज व हॉस्टल बनाए जाएंगे. तय समय-सीमा के अनुसार, अनुबंध शुरू होने के एक वर्ष के भीतर अस्पताल का अपग्रेडेशन पूरा करना होगा, जबकि चार वर्षों के भीतर मेडिकल कॉलेज का निर्माण और संचालन अनिवार्य होगा.
चार साल में मेडिकल कॉलेज शुरू करना होगा
इस योजना में आम और गरीब मरीजों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सख्त प्रावधान किए गए हैं. अस्पताल के कुल बेड में से 20 प्रतिशत पूरी तरह मुफ्त मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे। आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थी ‘फ्री पेशेंट’ की श्रेणी में आएंगे और उन्हें इलाज के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा. ओपीडी सेवाएं पूरी तरह निशुल्क होंगी और पंजीकरण शुल्क के रूप में अधिकतम ₹10 ही लिया जा सकेगा. वहीं पेड मरीजों के लिए भी दरों पर नियंत्रण रखा गया है. कुल 72 बेड पेड कैटेगरी में होंगे, जहां इलाज और जांच की दरें रांची सीजीएचएस दरों के अधिकतम डेढ़ गुना तक सीमित रहेंगी, जिससे निजी क्षेत्र के बावजूद इलाज महंगा न हो सके.
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मुफ्त जांच, दवाएं और आधुनिक ब्लड बैंक की सुविधा
डायग्नोस्टिक और दवा व्यवस्था को भी अत्याधुनिक बनाया जाएगा. राष्ट्रीय आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची में शामिल सभी जांचें मुफ्त मरीजों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध होंगी, जबकि राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची की दवाएं भी उन्हें मुफ्त दी जाएंगी. इसके अलावा अस्पताल परिसर में कंपोनेंट थेरेपी से लैस आधुनिक ब्लड बैंक स्थापित किया जाएगा, जिससे गंभीर मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी.
मेडिको-लीगल मामलों पर रहेगा सरकार का नियंत्रण
प्रशासनिक नियंत्रण के स्तर पर भी सरकार ने संतुलन बनाए रखा है. अस्पताल के हस्तांतरण के बाद शुरुआती दो वर्षों तक सरकारी डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ निजी डेवलपर के साथ मिलकर काम करेंगे और उनका वेतन राज्य सरकार ही देगी. वहीं मेडिकल इमरजेंसी, पोस्टमार्टम, मेडिको-लीगल मामलों और आधिकारिक बयानों का पूरा अधिकार सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के पास ही रहेगा. nसामाजिक जिम्मेदारी के तहत जेल कैदियों के इलाज के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है. मुफ्त बेड श्रेणी में से कम से कम 10 बेड का पृथक वार्ड कैदियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा.
