Lohardaga: सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केंद्र सरकार की नैतिक हार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दो वर्षों से चल रहे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया. उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव का परिणाम है.
दो वर्षों के संघर्ष का पहला बड़ा परिणाम
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी ने दो वर्ष पहले देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जो अभियान शुरू किया था, आज उसका पहला महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है. उनके अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी संवेदनशीलता का नहीं, बल्कि जनता के दबाव के आगे केंद्र सरकार के झुकने का संकेत है.
युवाओं की आवाज ने सरकार को झुकने पर किया मजबूर
उन्होंने कहा कि देशभर के छात्रों और युवाओं ने अन्याय के खिलाफ जिस तरह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की, उससे यह स्पष्ट हो गया कि उनकी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत थीं. यदि सही मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष किया जाए, तो सबसे अहंकारी सरकार को भी झुकना पड़ता है. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इसी जनदबाव और संघर्ष का परिणाम है.
छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी
सांसद भगत ने कहा कि यह केवल शुरुआत है. राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी, उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतांत्रिक संघर्ष अंततः अपनी जीत दर्ज करता है.
