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बोकारो: झारखंड और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक हैं गुरुजी-DC

Bokaro: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सुप्रीमो और पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को पूरे...

बोकारो
स्वर्गीय शिबू सोरेन कि पहली पुण्यतिथि मनाई गई

Bokaro: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सुप्रीमो और पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को पूरे राज्य में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. इसी क्रम में बोकारो में भी गुरुजी को याद करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.

संघर्ष और समाज सुधार के लिए हमेशा याद किए जाएंगे गुरुजी

बोकारो के DC अजय नाथ झा ने कहा कि स्वर्गीय शिबू सोरेन झारखंड और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने अपने पूरे जीवन में समाज के उत्थान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी.उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन, समाज को शिक्षित करने की पहल और नशामुक्त समाज बनाने के अभियान के जरिए लोगों को जागरूक किया. DC ने कहा कि शिबू सोरेन पूरे भारत में आदिवासी चेतना के महानायक के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे.

जल्द स्थापित होगी गुरुजी की प्रतिमा

DC अजय नाथ झा ने कहा कि गुरुजी स्मृति नगर भवन के पास जल्द ही स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह स्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके संघर्ष और योगदान को याद करने का केंद्र बनेगा.

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झारखंड निर्माण में गुरुजी का योगदान अहम

कार्यक्रम में बोकारो पुलिस अधीक्षक(SP) नाथू सिंह मीणा ने भी शिबू सोरेन के योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण से लेकर आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई में गुरुजी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

गुरुजी के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान

वहीं, JMM जिलाध्यक्ष रतनलाल मांझी ने शिबू सोरेन को देश के संपूर्ण आदिवासी समाज का सबसे बड़ा नेता बताया. उन्होंने कहा कि गुरुजी ने हमेशा शोषित और वंचित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे.

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