रांची: विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के सातवें दिन कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए नवीन जायसवाल ने कहा कि यह बजट आंकड़ों का खेल है. बोलने में पैसा नहीं लगता. चालू वित्तीय वर्ष में कृषि विभाग का 500 करोड़ रुपये सरेंडर हुआ. किसानों के लिए निर्धारित 2108 करोड़ रुपये में से 629 करोड़ रुपये ही खर्च हुए. पशुपालन विभाग में 456 करोड़ रुपये में से 94.37 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए. मिलेट मिशन में 64,692 किसानों ने आवेदन दिया, लेकिन एक भी किसान को अनुदान नहीं मिला. लक्ष्य के विरुद्ध धान की खरीद भी नहीं हुई. नगड़ी में पिछले एक महीने से धान का उठाव नहीं हो रहा है. बाजार समिति में 795 पद खाली हैं. उन्होंने कहा कि कृषि विभाग में गंभीरता की कमी है.

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सरकारी कंपनी में निजी कंपनी का बोर्ड
नवीन जायसवाल ने एयर एंबुलेंस मामले पर कहा कि रेड बर्ड एक निजी कंपनी है, जो 8.30 लाख रुपये लेती है, जबकि सरकारी एयर एंबुलेंस में 2.30 लाख रुपये ही खर्च होते हैं. उस दिन दो सरकारी एयर एंबुलेंस उपलब्ध थे, फिर भी निजी एयर एंबुलेंस से मरीज को भेजा गया. सरकारी कार्यालय में निजी कंपनी का बोर्ड लगा हुआ है। उस कार्यालय में 50 लोग काम करते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी आदिवासी-मूलवासी कर्मचारी नहीं है. सभी को हर महीने एक-एक लाख रुपये वेतन दिया जाता है.
मछली पालन में झारखंड आत्मनिर्भर: मथुरा महतो
मथुरा महतो ने कहा कि किसानों ने ही झारखंड आंदोलन किया था. इस बार के बजट में महिला किसानों के लिए विशेष योजना लाई गई है. प्रगतिशील किसान आगे आए हैं. राज्य में फूलों की खेती भी हो रही है. मछली पालन में झारखंड आत्मनिर्भर हो चुका है और आने वाले समय में दुग्ध उत्पादन में भी आत्मनिर्भर होगा. कृषि विभाग ने महिलाओं को आगे बढ़ाने का कार्यक्रम तैयार किया है. किसानों के लिए कई योजनाएं लाई गई हैं.
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किसानों की आवाज अनसुनी: मनोज यादव
मनोज यादव ने कहा कि किसानों की आवाज अनसुनी कर दी जाती है. किसानों का जीवन स्तर ऊपर उठाना एक बड़ी चुनौती है. राज्य में केवल 15 से 20 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित है. बांधों का रखरखाव भी ठीक नहीं है. सिंचाई और कृषि विभाग को मिलकर काम करने की जरूरत है. बिचौलिए किसानों से औने-पौने दाम पर धान खरीद रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित मांगुर मछली की तस्करी हो रही है, जिस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए. गोदाम नहीं होने के कारण धान की अधिप्राप्ति कम हो गई है. गोदामों की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए. गौरिया करमा में सुविधाएं बढ़ाई जाएं और योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से हो.
बजट से किसानों को राहत: राजेश कच्छप
राजेश कच्छप ने कहा कि बजट के जरिए किसानों को राहत मिलेगी. राज्य की जलवायु कृषि के लिए अनुकूल है और मिट्टी उपजाऊ है. राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. आने वाले दिनों में झारखंड मछली का निर्यातक राज्य बनेगा. पशुपालन को भी व्यवसायिक रूप दिया जाना चाहिए. सरकार किसानों के साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे पोखरों का जीर्णोद्धार होना चाहिए और कृषि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित होगा. इस दौरान नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि कोलेबिरा क्षेत्र में हाथियों के आतंक के कारण किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है.

