Click Here
Click Here
Click Here
Click Here
Click Here

बजट सत्रः बाबूलाल में सर्विस रूल के विपरित है DGP नियुक्त, CM बोले ये मैटर है सबज्यूडिश, चर्चा उचित नहीं

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन दूसरी पाली में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी नियुक्ति पर सवाल खड़े...

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन दूसरी पाली में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी नियुक्ति पर सवाल खड़े किए. सदन में कहा कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध हुई. 2025 में उनसे इस्तीफा लिया गया. फिर तदाशा मिश्रा को प्रभारी DGP बनाया गया. बाद में उन्हें प्रमोशन दिया गया. जब दो महीना उनकी सेवा बची थी तो उन्हें दिसंबर 2027 तक के लिए DGP बना दिया गया. यह सर्विस रूल के विपरीत है. इस पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सबज्यूडिस है. इस पर सदन में चर्चा उचित नहीं है. इस पर बाबूलाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जो वर्डिक्ट आया है कि राज्य को एक पैनल यूपीएससी को भेजना है. केंद्र में डीजी रैंक के एक भी अफसर पदस्थापित नहीं हैं. नियम-कानून को ताक पर रखकर डीजीपी बनाया गया है.

शराब घोटाले पर भी उठाए सवाल

बाबूलाल ने कहा कि शराब घोटाले को लेकर 2022 में ही CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखा था. कुछ दिन पहले उनके करीबी साथी की भी गिरफ्तारी हुई. इस घोटाले में करीब 28 लोगों के नाम हैं. गिरफ्तारी कई लोगों की हुई, बेल भी हुआ, लेकिन 90 दिनों में चार्जशीट नहीं हुआ. सूचना आयुक्त और लोकायुक्त का पद चार-पांच साल से खाली है. 18 खनिज खदानों की अब तक नीलामी नहीं हुई. खनिज ढुलाई में लगे वाहनों पर व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी नहीं लगाया गया. अब तक 40 फीसदी भी धान की खरीद नहीं हुई है. बिचौलियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस पर इरफान अंसारी ने कहा कि मार्च तक टारगेट पूरा कर लेंगे. 2022-23 और 2023-24 में सुखाड़ था.

वंदे मातरम और राज्यपाल अभिभाषण पर टिप्पणी

राज्यपाल के अभिभाषण पर बाबूलाल ने कहा कि भाषण सरकार का दस्तावेज होता है. इसमें खुद ही अपने आप को लाचार बता रहे हैं तो संशोधन क्या करें. बाबूलाल ने कहा कि एक दिन वंदे मातरम गीत पर चर्चा कराएं, हम तैयार हैं. उन्होंने कहा कि 26 जनवरी राष्ट्रीय उत्सव है. इस दिन सीएम का राज्य में नहीं रहना अजीब बात है. संताल के जसीडीह में उद्योग के नाम पर लोगों को जमीन से उजाड़ा जा रहा है. 1974 में जमीन अधिग्रहण किया गया था. वहां खेती की जमीन लूटी जा रही है. वहां नए सिरे से सीमा रेखा खींचें. मोदी सरकार को जितना कोसना है कोसिए, लेकिन जिनके लिए राजनीति कर रहे हैं उनको देखिए. आम्रापाड़ा कोल ब्लॉक में आदिवासी मूलवासी को एक एकड़ जमीन के बदले दूसरे जगह एक एकड़ जमीन दें. छोटा सा अबुआ आवास देने से कुछ नहीं होगा. आदिवासी समाज के लिए जमीन ही जीविकोपार्जन का साधन है. कागज में आयोग बनाने से नहीं चलेगा.

तिसरी और नगड़ी जमीन विवाद का मुद्दा

बाबूलाल ने कहा कि तिसरी में फॉरेस्ट विभाग के लोग जमीन से हटा रहे हैं. इसकी जांच के लिए विधानसभा की कमेटी बनाई जाए. अगर वहां खेती की जमीन नहीं होगी तो हम राजनीति छोड़ देंगे. रिम्स टू के लिए 1955-56 में जमीन एक्वायर हुआ था. उस समय और अब की स्थिति क्या है. आदिवासियों को नगड़ी से उजाड़ने में लगे हैं. गरीबों को न्याय देना होगा. इस पर इरफान अंसारी ने कहा कि नामकुम में RSS के कैंप के लिए जमीन दी गई थी. आज नगड़ी में हॉस्पिटल बन रहा है, न कि आरएसएस का कैंप या फाइव स्टार होटल. इस पर बाबूलाल ने कहा कि कहां से पढ़कर आए हैं. हम जमीन खोज कर देंगे. जसीडीह में डीसी को बोलकर उजाड़ने का काम रुकवाएं. संतालों के खेत उजाड़े जा रहे हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *