Ranchi: झारखंड सरकार ने नई दिल्ली (वसन्त विहार) स्थित ‘झारखंड भवन’ और ‘न्यू झारखंड भवन’ में कमरों के आवंटन और उनके आरक्षण शुल्क (किराया) में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. समिति की अनुशंसा के बाद कमरों के शुल्क में पुनरीक्षण का नया प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई.

मंत्रियों और न्यायाधीशों को पूरी छूट
नए नियमों के अनुसार, राज्य के मंत्रीगण, दर्जा प्राप्त मंत्री, राज्य मंत्री और उनके आप्त सचिवों के साथ-साथ झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को बड़ी राहत दी गई है. ये सभी महानुभाव सरकारी या निजी, किसी भी कार्य से ठहरने पर पूरी तरह निःशुल्क (फ्री) आवासन का लाभ उठा सकेंगे. वहीं, राज्य के विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए निजी कार्य के दौरान ठहरने पर विभागीय अधिसूचना (वर्ष 2015) के तहत मात्र 100 रुपये प्रतिदिन का शुल्क लागू रहेगा.
सरकारी अधिकारियों और जिला जजों के लिए नियम
जिलों के न्यायाधीशों और वेतन प्राप्त सरकारी सेवकों के लिए नियमों को दो भागों में बांटा गया है. यदि ये अधिकारी सरकारी कार्य से दिल्ली आते हैं, तो इन्हें मात्र 100 रुपये प्रतिदिन देना होगा. लेकिन, यदि वे निजी कार्य से ठहरते हैं, तो पहले से तीसरे दिन के लिए 750 रुपये, चौथे से छठे दिन के लिए 1000 रुपये और सातवें दिन या उससे अधिक रुकने पर 2000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क देना होगा.
परिजनों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए दरें
मंत्रियों, न्यायाधीशों, विधायकों और सेवारत सरकारी कर्मचारियों के निकटतम पारिवारिक सदस्यों (जैसे पति-पत्नी, आश्रित पुत्र-पुत्री और माता-पिता) के निजी कार्य से ठहरने पर भी व्यावसायिक दरों से राहत दी गई है. इनके लिए 1 से 3 दिनों का किराया 750 रुपये, 4 से 6 दिनों का 1500 रुपये और 7 दिन या उससे अधिक के लिए 2500 रुपये प्रतिदिन प्रस्तावित है. यही समान दरें (750, 1500 और 2500 रुपये) सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों, पूर्व सांसदों और उनके निकटतम पारिवारिक सदस्यों के निजी प्रवास पर भी लागू होंगी.
आम नागरिकों और वीआईपी सिफारिश पर आने वालों के लिए भारी शुल्क
झारखंड भवन में आम नागरिकों और उपर्युक्त महानुभावों की सिफारिश (अनुशंसा) पर आने वाले अन्य सभी व्यक्तियों के निजी कार्य से रुकने पर सबसे तगड़ी दरें तय की गई है. इस श्रेणी के लोगों को शुरुआती 1 से 3 दिनों के लिए 3000 रुपये प्रतिदिन, 4 से 6 दिनों के लिए 4000 रुपये प्रतिदिन और यदि वे 7 दिन या उससे अधिक ठहरते हैं, तो उन्हें 5000 रुपये प्रतिदिन की दर से कमरे का आरक्षण शुल्क चुकाना.
आयुष्मान भारत को अवधि विस्तार
झारखंड में संचालित आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को 30 सितंबर तक का अवधि विस्तार दिया गया. गृह विभाग के दैनिकभोगी कर्मी मंगरा उरांव के सेवा नियमितिकरण की स्वीकृति दी गई. झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक 2026 के अनुमोदन की स्वीकृति दी गई.
ग्रमीण स्वास्थ्य के लिए “अबुआ दवाखाना” योजना
राज्य सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए “अबुआ दवाखाना” (एकीकृत औषधि केंद्र) योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत राज्य के सभी 24 जिलों के 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ये केंद्र खोले जाएंगे. इन दवाखानों में मरीजों को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धतियों की आवश्यक दवाएं एक ही छत के नीचे मुफ्त मिलेंगी. इन केंद्रों का डिजाइन एक समान (मॉडल फार्मेसी आउटलेट जैसा) होगा, जिसमें दवाओं के लिए अलग-अलग रैक, रेफ्रिजरेटर और कंप्यूटरीकृत सिस्टम की व्यवस्था होगी.
कलाकारों के लिए मासिक पेंशन योजना
राज्य के वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग कलाकारों की मदद के लिए मासिक निवृत्तिका (पेंशन) योजना में संशोधन किया गया है. अब पात्र कलाकारों को हर महीने 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इस योजना के लिए सामान्य आयु सीमा 60 वर्ष तय की गई है, लेकिन गंभीर बीमार या दिव्यांग कलाकारों के लिए उम्र का यह बंधन हटा दिया गया है. योजना का लाभ केवल उन कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से मासिक आय 8,000 रुपये से कम है.
सेवानिवृत्त जजों के भत्तों में भारी बढ़ोतरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में झारखण्ड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों (या उनके जीवित पति/पत्नी) के भत्तों में वृद्धि की गई है. इसके तहत सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को अब कुल 65,000 रुपये प्रति माह (50,000 रुपये घरेलू नौकर/ड्राइवर भत्ता और 15,000 रुपये मोबाइल, इंटरनेट व सुरक्षा भत्ता) मिलेंगे. वहीं, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को कुल 60,000 रुपये प्रति माह (45,000 रुपये घरेलू नौकर/ड्राइवर भत्ता और 15,000 रुपये अन्य सेवाओं के लिए) दिए जाएंगे.
पेट्रोल, डीजल और शराब विक्रेताओं को टैक्स रिटर्न से राहत
व्यापारियों की मांग पर सरकार ने वैट (VAT) नियमों में ढील दी है. राज्य के भीतर पेट्रोल, डीजल और शराब (मदिरा) बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं, जो पहले ही खरीद के समय वैट का भुगतान कर देते हैं, उन्हें अब त्रैमासिक विवरणी (फॉर्म JVAT 200) और मासिक विवरण (फॉर्म JVAT 213) दाखिल करने से छूट देने की स्वीकृति दी गई है. इससे व्यवसायियों को कागजी कार्रवाई और समय की बर्बादी से मुक्ति मिलेगी.
