Ranchi: वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान राजस्व प्राप्तियां 7.46 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 94,489 करोड़ तक जरूर पहुंचीं, लेकिन इसके पीछे की मुख्य वजह केंद्र सरकार के करों में मिला हिस्सा था. केंद्रीय करों और शुल्कों में राज्य की हिस्सेदारी 2015-16 के 15,969 करोड़ से छलांग लगाकर 2024-25 में 42,557 करोड़ हो गई. इसका खुलासा मंगलवार को विधानसभा में पेश हुए कैग की रिपोर्ट में हुआ है.
स्व-कर राजस्व की रफ्तार बेहद धीमी
राज्य के स्व-कर राजस्व में मामूली रूप से मात्र 1.77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, गैर-कर राजस्व जीएसडीपी का महज 2.76 प्रतिशत रहा. इसके अलावा, केंद्र से मिलने वाला सहायता अनुदान पिछले साल के स्तर पर ही टिका रहा. राज्य का कुल व्यय (राजस्व व्यय, पूंजीगत व्यय और ऋण एवं अग्रिम) बढ़कर 1,09,212 करोड़ हो गया. राजस्व व्यय 2024-25 में बढ़कर 86,565 करोड़ (जीएसडीपी का 16.77%) हो गया.
प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी का बोझ
राजस्व व्यय का 37.24 प्रतिशत हिस्सा वेतन, मजदूरी, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे ‘प्रतिबद्ध व्यय’ में जकड़ा हुआ है. वहीं, सब्सिडी का आंकड़ा 4,831 करोड़ से बढ़कर सीधे ₹7,889 करोड़ पर पहुंच गया है, जिसमें अकेले ऊर्जा सब्सिडी ( 5,537 करोड़) का हिस्सा 70 प्रतिशत है. सरकार ने परिसंपत्तियों (जैसे सड़कें, पुल, अस्पताल आदि) के निर्माण के लिए होने वाले पूंजीगत व्यय को घटा दिया है. 2023-24 में जहां इस पर 20,570 करोड़ खर्च हुए थे, वहीं 2024-25 में यह घटकर 1,8410 करोड़ पर आ गया.
राजकोषीय घाटे में रिकॉर्ड उछाल
जहां 2023-24 में राजकोषीय घाटा 6,332 करोड़ (जीएसडीपी का 1.36%) था, वह 2024-25 में खतरनाक तरीके से बढ़कर 14,527 करोड़ (जीएसडीपी का 2.81%) पर जा पहुंचा. हालांकि राजस्व अधिशेष ₹ 7,924 करोड़ (जीएसडीपी का 1.53%) दर्ज किया गया, लेकिन पिछले साल के 11,252 करोड़ के मुकाबले यह भारी गिरावट को दर्शाता है. भले ही एफआरबीएम नियमों के दायरे के भीतर बकाया देनदारियां (25.34%) होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकार की कुल बकाया देनदारियां 2020-21 के 1,09,184.99 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 1,30,798.56 करोड़ पहुंच चुकी हैं.
हजारों करोड़ की भारी बचत
राज्य के कुल 1,50,938.84 करोड़ के बजट में से 31,110 करोड़ (कुल बजट का 20.61%) बिना इस्तेमाल के यूं ही बेकार पड़े रहे. इनमें से 19,648.71 करोड़ की बचत दस ऐसे अनुदानों में हुई जहां बजट प्रावधानों के 7 से 62 प्रतिशत तक पैसे खर्च ही नहीं किए गए और विनियोग लेखों में इसके कोई ठोस कारण तक नहीं बताए गए. साल के दौरान 46 मामलों में 5,407 करोड़ के अनुपूरक प्रावधान पूरी तरह अनावश्यक साबित हुए, क्योंकि विभाग मूल प्रावधानों तक भी खर्च नहीं पहुंचा पाए. सरकार ने पूंजीगत व्यय के तहत राजस्व प्रकृति के सहायता-अनुदान के रूप में 2,879.71 करोड़ की हेराफेरी दर्ज की. 42.45 करोड़ को पूंजीगत के बजाय राजस्व अनुभाग में गलत तरीके से दिखाया गया, जिससे राजस्व अधिशेष बढ़ा हुआ नजर आए.
श्रम उपकर का गबन
मार्च 2025 तक, श्रम उपकर की कुल 945.67 करोड़ की राशि में से पिछले तीन वर्षों में मात्र 473.74 करोड़ ही हस्तांतरित किए गए. 31 मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ की राशि के 52,855 उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को सौंपे ही नहीं गए. 4,531 करोड़ की राशि के 17,877 एसी विपत्रों के मुकाबले डीसी विपत्र जमा ही नहीं कराए गए. पीडी खातों के 24 प्रशासकों में से मात्र 3 प्रशासकों ने कोषागार के आंकड़ों के साथ अपनी शेष राशि का मिलान और सत्यापन किया. बाकी 21 ने पारदर्शिता के सभी मानदंडों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया. नवंबर 2025 तक झारखण्ड सरकार ने लघु खनिजों से जुड़ी खोज गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए लोक लेखा या बैंक खाते के तहत ‘राज्य खनिज अन्वेषण न्यास’ तक का गठन नहीं किया था.
