Ranchi: परिवहन विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली नागरिक-केंद्रित सेवाओं और राजस्व संग्रहण की स्थिति बेहद दयनीय पाई गई है. अगस्त 2024 से मार्च 2025 के बीच की गई लेखापरीक्षा (2019-20 से 2023-24 तक की अवधि) में कुल 415.89 करोड़ का वित्तीय निहितार्थ सामने आया है. इसके अलावा, 2023-24 के दौरान अन्य कार्यालयों में 96.67 करोड़ के और खुलासे हुए हैं. इसका खुलासा मंगलवार को विधानसभा में पेश कैग की रिपोर्ट में हुआ है.
फर्जी शुल्क और वेंडर्स की चांदी
विभाग ने लर्निंग लाइसेंस के नाम पर जनता से अवैध वसूली करवाई. नियमों के विरुद्ध जाकर वेंडर्स को एल.एल. के लिए 25 रुपये का निश्चित शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया, जबकि वेंडर्स केवल प्रिंटिंग का काम कर रहे थे. इलेक्ट्रॉनिक रूप से एल.एल जारी करने के अनिवार्य नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वेंडर्स ने 2017 से 2024 के बीच आवेदकों से 4.09 करोड़ ऐंठ लिए.
नाबालिगों को ड्राइविंग लाइसेंस और घटिया परीक्षण पथ
मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों को ठेंगा दिखाते हुए, सारथी पोर्टल की तकनीकी कमियों के कारण 2019 से 2024 के बीच पांच जिलों में 18 साल से कम उम्र के 305 नाबालिगों को गियर वाली मोटरसाइकिल के लाइसेंस जारी कर दिए गए. हद तो तब हो गई जब विभाग आज तक स्वचालित चालन परीक्षण पथ स्थापित नहीं कर पाया और अस्थायी, घटिया रास्तों पर ड्राइवरों का टेस्ट लेकर उनकी जान से खिलवाड़ करता रहा.
अपंजीकृत वाहनों का खुला खेल और टैक्स चोरी
2019-24 के दौरान 6,640 वाहनों का अस्थायी पंजीकरण होने के बाद भी उनका स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया. वाहन एप्लीकेशन में चेतावनी प्रणाली न होने के कारण सड़कों पर हजारों अपंजीकृत वाहन मौत बनकर दौड़ते रहे और सरकार को भारी टैक्स का चूना लगा. वाहन एप्लीकेशन के जरिए टीआर जारी करने में असमर्थता के कारण मेसर्स टाटा मोटर्स ने 6 महीने के बजाय सिर्फ 1 महीने की वैधता के साथ टीआर जारी किए, जिससे 2021-24 के दौरान 327.35 करोड़ का कम संग्रहण हुआ. इसके अलावा, नियमों के विरुद्ध व्यापार पंजीकरण चिह्न का उपयोग करके वाहन भेजने से रुपये 36.92 लाख का टैक्स अपवंचन हुआ. हजारों वाहन बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट और आरसी नवीकरण के सड़कों पर दौड़ते पाए गए. सीएफ नवीकरण की व्यवस्था फेल होने के कारण समाप्त हो चुके सीएफ वाले 4,458 वाहन सड़कों पर खुलेआम घूम रहे थे, जिससे रुपये 7.58 करोड़ का नुकसान हुआ.
टैक्स वसूली में कोताही और अधिकारियों की मिलीभगत
परिवहन वाहनों, एकमुश्त कर दाताओं और पारस्परिक समझौते वाले वाहनों से करोड़ों रुपये के करों का गैर-उद्ग्रहण हुआ. उदाहरण के लिए, 13 नमूना-जांचित जिला परिवहन कार्यालयों में ही 6,925 वाहन मालिकों से 62.93 करोड़ रुपये का मोटर वाहन कर और जुर्माना वसूला ही नहीं गया. बैंक की लापरवाही भी कम नहीं रही. अधिकारियों द्वारा HDFC बैंक पीओएस मशीनों के माध्यम से संग्रहित 47.21 करोड़ की राशि बैंक ने 2 से 8 महीने की देरी से सरकारी खाते में जमा की, जिसके लिए बैंक पर 1.23 करोड़ का दंडात्मक ब्याज बनता है. ओवरलोडिंग के खिलाफ भी कानून मजाक बनकर रह गया. मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडित 693 ओवरलोड वाहनों से सड़क मार्ग अधिनियम के तहत जुर्माना नहीं वसूला गया, जिससे 2.69 करोड़ का नुकसान हुआ. वे-ब्रिज उपलब्ध न होने के कारण ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ते रहे.
बजट का दुरुपयोग और अप्रयुक्त राशि
वर्ष 2024-25 में कुल बजट 1,50,938.84 करोड़ में से 31,110 करोड़ (कुल बजट का 20.61 प्रतिशत) की राशि इस्तेमाल ही नहीं हो पाई और अप्रयुक्त रह गई. हैरानी की बात यह है कि इसमें से 19,648.71 करोड़ की बचत दस ऐसे अनुदानों में हुई, जहां बजट प्रावधानों का 7 से 62 प्रतिशत हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ और विनियोग लेखों में इसका कोई वाजिब कारण भी नहीं बताया गया.
अनावश्यक अनुपूरक प्रावधान और अतिरिक्त व्यय
वर्ष के दौरान 46 मामलों में 5,407 करोड़ के अनुपूरक प्रावधान पूरी तरह अनावश्यक साबित हुए, क्योंकि वास्तविक खर्च मूल प्रावधानों तक भी नहीं पहुंच पाया. इसके विपरीत, संविधान के नियमों को ताक पर रखकर विनियोग संख्या 15 (पेंशन) के तहत विधानसभा की मंजूरी के बिना 306.62 करोड़ का अतिरिक्त संवितरण कर दिया गया. मार्च 2025 तक पुराने वित्तीय वर्षों के 4,046.43 करोड़ के अतिरिक्त व्यय को भी नियमित नहीं किया गया था.
गलत लेखांकन और झूठा राजस्व प्रदर्शन
राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय के तहत राजस्व प्रकृति के सहायता-अनुदान के रूप में 2,879.71 करोड़ की राशि दर्ज कर दी. इसी तरह 42.45 करोड़ को पूंजीगत अनुभाग के बजाय राजस्व अनुभाग में गलत तरीके से दिखाया गया. इस फर्जी और गलत वर्गीकरण के कारण राज्य का राजस्व अधिशेष बढ़ा हुआ दिखाया गया, जो कि हकीकत से कोसों दूर था. 31 मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ की राशि के 52,855 उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रधान महालेखाकार को सौंपे ही नहीं गए. इसी प्रकार, 17,877 एसी विपत्रों के विरुद्ध 4,531.00 करोड़ के डीसी विपत्र जमा नहीं किए गए.
श्रम उपकर और व्यक्तिगत जमा खातों में गड़बड़ी
मार्च 2025 तक श्रम उपकर की कुल राशि 945.67 करोड़ में से पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने सिर्फ 473.74 करोड़ ही हस्तांतरित किए, जिससे BOCW कल्याण बोर्ड को देने के लिए 471.93 करोड़ की राशि बकाया रह गई. व्यक्तिगत जमा खातों के 24 प्रशासकों में से सिर्फ 3 प्रशासकों ने कोषागार के आंकड़ों के साथ अपनी शेष राशि का मिलान और सत्यापन किया.
फैक्ट फाइल
• वेंडर्स द्वारा अवैध रूप से 4.09 करोड़ की वसूली.
• 6,640 वाहनों का स्थायी पंजीकरण नहीं, टाटा मोटर्स की गड़बड़ी से 327.35 करोड़ का नुकसान.
• कुल बजट का 20.61 प्रतिशत यानी 31,110 करोड़ का अप्रयुक्त रहना.
• 1,60,565.80 करोड़ की राशि के 52,855 यूसी गायब.
• 4,531.00 करोड़ के डीसी विपत्र लंबे समय से लंबित.
• कल्याण बोर्ड को हस्तांतरित करने के लिए 471.93 करोड़ का बकाया.
कैग की अनुशंशाएं
• परिवहन विभाग को स्मार्ट कार्ड सेवाओं और वेंडर्स की कार्यप्रणाली की व्यापक जांच करानी चाहिए और अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगानी चाहिए.
• सभी जिलों में स्वचालित चालक परीक्षण पथ और स्वचालित परीक्षण केंद्रों की स्थापना में तेजी लाई जाए, ताकि फर्जी फिटनेस और लाइसेंस पर अंकुश लगे.
• ओवरलोडिंग रोकने के लिए तुरंत वे-ब्रिज स्थापित किए जाएं और मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए.
• लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र और डीसी बिलों को जल्द से जल्द जमा कराने के लिए डीडीओ स्तर पर कड़ी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए.
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