Ranchi: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को 20 साल बाद एक बड़ी सफलता मिली है. दो दशक पुराने और बेहद चर्चित मामले में सीबीआई को यह सफलता मिली है. धनबाद जिले के एसबीआई मुख्य शाखा, धनबाद बैंक घोटाला मामले में सीबीआई ने लंबे समय से फरार चल रहे दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है. पकड़े गए दोनों आरोपी पिछले 20 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंककर लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदल रहे थे.
नेपाल भाग गए थे आरोपी, जारी हुआ था रेड कॉर्नर नोटिस:
जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि जैसे ही सीबीआई ने वर्ष 2005 में इस घोटाले का भंडाफोड़ किया, मामले के दो मुख्य आरोपी बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह तुरंत देश छोड़कर नेपाल भाग गए. अदालत द्वारा बार-बार समन जारी होने के बावजूद पेश न होने पर दोनों को घोषित अपराधी करार दिया गया था. इतना ही नहीं, दोनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खोज के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था और उनकी गिरफ्तारी की सूचना देने पर नकद इनाम की घोषणा की गई थी.

पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में काट रहे थे फरारी:
कुछ समय तक नेपाल में रहने के बाद दोनों आरोपी गुप्त रूप से भारत लौट आए थे. गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए दोनों ने अपनी असली पहचान छिपा ली और अलग-अलग राज्यों के सुदूर इलाकों में रहने लगे. पिछले 3-4 महीनों से सीबीआई एसीबी धनबाद की एक विशेष टीम दोनों की धरपकड़ के लिए सघन अभियान चला रही थी. इस दौरान टीम ने तकनीकी निगरानी और मैनपावर का बेहतरीन तालमेल बिठाया, जिससे आरोपियों के वर्तमान ठिकानों की सटीक लोकेशन ट्रेस की जा सकी.
एक साथ दो राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारी:
रविवार को सीबीआई ने एक बेहद गोपनीय और संयुक्त ऑपरेशन प्लान किया. दोनों आरोपियों को एक ही समय पर अलग-अलग राज्यों से दबोचने के लिए छापेमारी की गई बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से गिरफ्तार किया गया. जबकि करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हिरासत में लिया गया.
क्या है पूरा मामला?:
जानकारी के अनुसार, यह मामला साल 2005 का है. 31 अगस्त 2005 को सीबीआई ने केस संख्या RC-11(A)/2005-D के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी.
आरोप था कि नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा (बैंक मोड़, धनबाद) से सुनियोजित तरीके से करीब 1.25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और गबन को अंजाम दिया गया था.इस मामले में सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था.


