Chaibasa: टोन्टो प्रखंड में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) (पेसा) अधिनियम के तहत झारखंड पेसा नियमावली-2025 के अनुसार प्रखंड स्तरीय कमेटी के गठन को लेकर 30 जुलाई को अंचल कार्यालय टोन्टो में बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता अंचल अधिकारी ने की, जिसमें मानकी, मुंडा, सरकारी अधिकारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) के प्रतिनिधियों सहित कुल 10 सदस्य शामिल हुए. हालांकि कमेटी गठन के प्रस्ताव पर मानकी-मुंडाओं ने असहमति जताई, जिसके कारण बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी.
कमेटी गठन के प्रस्ताव पर जताई गई आपत्ति
बैठक में अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक, मानकी शंकर लागुरी, मानकी बैजनाथ बारी, मुंडा रामेश्वर सिंह, मुंडा सोना सालेन हांसदा, मुंडा माथुरा दोराईबुरु, राकेश मालिक, अभिक मंडल (NGO) तथा पंचायत समिति सदस्य स्माइल दास सहित अन्य लोग मौजूद थे.
बैठक में बताया गया कि झारखंड पेसा नियमावली-2025 के तहत प्रखंड स्तर पर गठित होने वाली कमेटी में अध्यक्ष के रूप में अंचल अधिकारी तथा सदस्य के रूप में वन क्षेत्र पदाधिकारी, JPS, एक मानकी अथवा मुंडा और एक NGO प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह कमेटी प्रखंड स्तर पर बैठक कर स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करेगी.
पेसा नियमावली की वैधानिकता पर उठे सवाल
बैठक के दौरान उपस्थित मानकी-मुंडाओं ने कमेटी गठन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूरे कोल्हान क्षेत्र में पेसा नियमावली-2025 की वैधानिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इस दौरान पेसा अधिनियम-1996 और झारखंड पेसा नियमावली-2025 का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया. वक्ताओं ने सवाल उठाया कि 29 वर्ष बाद नियमावली को लागू करने की प्रक्रिया कितनी कानून सम्मत है और इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों में राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना नगरपालिका अधिनियम-2011 लागू किए जाने और झींकपानी, मझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर तथा चक्रधरपुर जैसे क्षेत्रों में नगरपालिकाओं के विस्तार पर भी आपत्ति जताई गई. वक्ताओं ने इसे कानून का उल्लंघन बताया. बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जा चुकी है, जिसके याचिकाकर्ता कोल्हान के चाईबासा निवासी सुभाष बारी हैं. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित है.

बैठक में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के विक्टोर मालटो ने पेसा कानून और झारखंड नियमावली-2025 का कानूनी विश्लेषण प्रस्तुत किया. इस अवसर पर अधिवक्ता अशोक बिरुवा, कृष्ण बिरुवा, विजय सुंडी, साधु हो, बाहारा हेम्ब्रोम, नरेश बानरा, शंकर लागुरी, राजश्री सवैंया सहित कई समाजसेवी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे.
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