Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में मंडल कारा, चाईबासा में संचालित “प्रोजेक्ट परिवर्तन: हुनर से पहचान” के अंतर्गत आरसेटी, चाईबासा द्वारा आयोजित 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शिविर का आज समापन हो गया. यह प्रशिक्षण शिविर 13 जून से शुरू हुआ जो 10 दिनों तक चला. समापन समारोह में उपायुक्त मनीष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जूझार माझी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टूटी, जेल अधीक्षक सुनील कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक विष्णु जी तथा आरसेटी निदेशक संदीप बिरुली सहित अन्य उपस्थित रहे. उपायुक्त मनीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और नई शुरुआत का अवसर भी है. जिला प्रशासन का प्रयास है कि यहां रह रहे प्रत्येक बंदी को ऐसा कौशल प्रदान किया जाए, जिससे वह अपनी सजा पूरी करने के बाद आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट सके. उन्होंने कहा कि “प्रोजेक्ट परिवर्तन: हुनर से पहचान” का उद्देश्य बंदियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. मशरूम उत्पादन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे कम लागत और सीमित संसाधनों के साथ भी सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है. उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का पूर्ण उपयोग करें, स्वयं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें तथा अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बनें. उपायुक्त ने कहा कि जीवन में हुई गलतियों को पीछे छोड़कर सकारात्मक सोच, परिश्रम और कौशल के बल पर एक नई पहचान बनाई जा सकती है तथा जिला प्रशासन इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है.

कौशल प्रशिक्षण से लोग होते हैं आर्थिक रूप से मजबूत
सिविल सर्जन डॉ.जूझार माझी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता का विशेष महत्व होता है. कौशल प्रशिक्षण न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनने का माध्यम है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन एक लाभकारी स्वरोजगार गतिविधि है, जिसके माध्यम से प्रशिक्षु अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं. उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को नशामुक्त एवं अनुशासित जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए हानिकारक है. उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और समाज में भी नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण प्राप्त बंदी भविष्य में समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित करेंगे और अपने अनुभवों से अन्य लोगों को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करेंगे. समापन समारोह के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करनेवाले 30 बंदी प्रशिक्षुओं ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उक्त प्रशिक्षण से पूर्व उन्हें स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन एक लाभकारी एवं कम लागत वाला उद्यम है, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है. प्रशिक्षुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि कारा से बाहर आने के पश्चात वे इस प्रशिक्षण का उपयोग स्वरोजगार स्थापित करने में करेंगे तथा अपने आसपास के अन्य लोगों को भी इससे जोड़ने का प्रयास करेंगे.


