चाईबासा : ऊसरूईया नदी पर निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

Chaibasa : 3 अगस्त पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र स्थित ऊसरूईया गांव के समीप निर्माणाधीन पुल को लेकर ग्रामीणों में गहरी...

Chaibasa : 3 अगस्त पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र स्थित ऊसरूईया गांव के समीप निर्माणाधीन पुल को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता व्याप्त है. क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि लगभग पांच वर्षों से पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया जा सका. बरसात के मौसम में दर्जनों गांवों का संपर्क अब भी बाधित होने का खतरा बना हुआ है.

ग्रामीणों आरोप है कि

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल सारंडा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया. पुल के ज्वाइंट, बीम, एप्रोच सड़क और गार्डवाल के निर्माण को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं. हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पुल निर्माण में कार्यरत मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक कार्य कराने के बावजूद उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिला. ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य के शुरुआती दौर में शिकायत मिलने पर तत्कालीन सांसद गीता कोड़ा ने भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था. ग्रामीणों का दावा है कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मामले को उच्च स्तर पर उठाने की बात कही थी.

ग्रामीणों की मांग 

ग्रामीणों ने मांग की है कि पुल निर्माण की संपूर्ण गुणवत्ता की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए. उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक ठेकेदार के अंतिम भुगतान पर रोक लगाई जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. ऊसरूईया नदी पर बन रहा यह पुल छोटानागरा, सोनापी, हतनाबरू, बढ़ुईआ, ऊसरूईया, कुदलीबाद, कोलाइबुरु, कुमडीह, बालिबा और थोलकोबाद सहित दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा माना जाता है. प्रत्येक वर्ष बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय, थाना, अस्पताल, हाट-बाजार, अनुमंडल और जिला मुख्यालय से लगभग कट जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि

ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क बाधित होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उपज को बाजार तक ले जाने और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. वनोपज और कृषि उत्पाद समय पर बाजार नहीं पहुंच पाने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए. यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए और पुल का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और स्थायी आवागमन की सुविधा मिल सके.

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