सरायकेला: एक परियोजना-एक मंच-एक आवाज, चांडिल डैम विस्थापितों ने बनाया समन्वय मंच

Saraikela: चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापितों ने करीब चार दशकों से लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अब एकजुट होने...

Chandil Dam
Saraikela: 'One Project, One Platform, One Voice' – Chandil Dam displacees form a coordination forum.

Saraikela: चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापितों ने करीब चार दशकों से लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अब एकजुट होने का फैसला लिया है. रविवार को चांडिल स्थित आईबी परिसर में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न संगठनों ने सर्वसम्मति से “चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच” का गठन किया. बैठक का मुख्य उद्देश्य “एक परियोजना-एक मंच-एक आवाज-सामूहिक नेतृत्व” की अवधारणा को जमीन पर उतारना था. इसमें तय किया गया कि अब विस्थापितों की लड़ाई अलग-अलग मंचों से नहीं, बल्कि एक संयुक्त मंच के बैनर तले लड़ी जाएगी.

सामूहिक नेतृत्व में लड़ी जाएगी लड़ाई

बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि विस्थापितों के भूमि अधिकार, पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं सहित अन्य लंबित मुद्दों के समाधान के लिए संयुक्त रूप से संघर्ष किया जाएगा. वक्ताओं ने कहा कि चांडिल डैम परियोजना के कारण हजारों परिवारों ने अपनी जल, जंगल, जमीन, आजीविका, संस्कृति और सामाजिक पहचान खो दी. लेकिन 44 वर्षों बाद भी पुनर्वास और विकास के अनेक वादे अधूरे हैं. अब समय आ गया है कि संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से इन समस्याओं का समाधान कराया जाए.

बैठक में लिए गए पांच प्रमुख निर्णय

बैठक में निर्णय लिया गया कि 5 अगस्त 2026 को पुनः संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अनुपस्थित सभी विस्थापित संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा. 7 अगस्त 2026 को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान संबंधित मंत्री और विभागीय सचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसके अलावा स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के प्रशासक एवं अपर निदेशक (पुनर्वास) को भी विस्तृत ज्ञापन दिया जाएगा. विभिन्न संगठनों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल गठित किया गया है, जो अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर विस्थापितों का पक्ष रखेगा. साथ ही यह भी तय किया गया कि आगे के सभी आंदोलन, बैठकें और कार्यक्रम समन्वय मंच के बैनर तले संचालित होंगे.

साझे मुद्दों पर साझा संघर्ष

बैठक में सभी संगठनों ने प्रत्येक संगठन की अलग पहचान का सम्मान करते हुए साझा मुद्दों पर संयुक्त संघर्ष करने पर सहमति जताई. बैठक के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में “एक परियोजना-एक मंच-एक आवाज” के सिद्धांत पर चलते हुए विस्थापितों के न्याय, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाने का संकल्प लिया. इस अवसर पर अंबिका जादव, अनूप महतो डोबो, मंजू गोराई, नारायण गोप, सरोज सहदेव, हरे कृष्णा महतो, जितेंद्र नाथ महतो, विवेक सिंह बाबू, राकेश रंजन महतो तथा विभिन्न विस्थापित संगठनों और गांवों से आए अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे.

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