Chaibasa: बंदगांव प्रखंड अंतर्गत मेरोंमगुटू पंचायत में रक्षा बंधन के अवसर पर रक्षा बंधन स्टॉल का उद्घाटन किया गया. स्टॉल का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य जसफीन हमसाय, प्रखंड विकास पदाधिकारी भीषम कुमार तथा मेरोंमगुटू पंचायत के मुखिया चिरपी बोदरा ने संयुक्त रूप से किया. रक्षा बंधन के अवसर पर लगाए गए इस विशेष स्टॉल में आकर्षक एवं पारंपरिक राखियों के साथ-साथ स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है. स्टॉल के माध्यम से स्थानीय महिला समूहों एवं आजीविका से जुड़ी दीदियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए एक बेहतर मंच उपलब्ध कराया गया है. इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य जसफीन हमसाय ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इस प्रकार के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बाजार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेंगी. उन्होंने लोगों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और महिला समूहों को प्रोत्साहित करने की अपील की.

यह भी पढ़ें: JPSC-JSSC विवाद पर सुदेश महतो का बड़ा हमला, बोले- CBI जांच से ही खुलेगा मुख्य सरगना का राज

ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित राखी की सराहना
वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी भीषम कुमार ने कहा कि रक्षा बंधन स्टॉल केवल पर्व के अवसर पर उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की एक सार्थक पहल है. महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है. कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने स्टॉल का अवलोकन करते हुए महिलाओं द्वारा तैयार किए गए राखी एवं अन्य स्थानीय उत्पादों की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी. कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा स्थानीय महिलाओं की आजीविका एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग का संकल्प लिया. उल्लेखनीय है कि यह रक्षा बंधन स्टॉल पलाश दीदी कैफे, बंदगांव एवं संकुल संगठन मेरोंमगुटू से जुड़ी दीदियों की आजीविका और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल है. इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर को पहचान दिलाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा.

