Chaibasa: समाहरणालय सभागार में रविवार को भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरूवा की अध्यक्षता में झींकपानी एसीसी अडानी प्लांट को बचाने के लिए त्रिपक्षीय वार्ता हुई. वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकला, इससे फैक्ट्री के मजदूर एवं ग्रामीणों में रोष है. हालांकि पदाधिकारियों ने इस संबंध में किसी तरह की बात मीडिया को बताने से इंकार कर दिया है.

प्लांट हेड को अपने मैंनेजमेंट से जल्द वार्ता करने का निर्देश
उपायुक्त मनीष कुमार ने प्लांट हेड को अपने मैंनेजमेंट से जल्द वार्ता करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि काम जब तक बंद है, तब तक कोई सामान बाहर नहीं जाएगा और न ही कोई बाहर से आएगा. क्षेत्र में धारा 144 लगा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि मजदूरों को बकाया रकम कंपनी भुगतान करें. अहमदाबाद बोर्ड से जब तक कंपनी का कोई निर्णय नहीं आता है, तब तक में कर्मियों को अन्य कार्यों में लगाया जाए.
बिना नोटिस काम बंद होने से स्थानीय मजदूरों के सामने आजीविका का संकट
इस वार्ता में पुलिस अधीक्षक अमित रेणु, सांसद जोबा मांझी, जिले के विधायक, चाईबासा, मजदूर प्रतिनिधि और एसीसी प्रबंधन के पदाधिकारी, संघर्ष समिति के संयोजक रमेश बालमुचू, मुंडा गुरुचरण मुंडा, प्रखंड प्रमुख प्रदीप तामसोय सहित कई लोग मौजूद थे. ग्रामीणों ने कहा कि एसीसी अडानी सीमेंट प्लांट में बीते 30 अप्रैल से शटडाउन के नाम पर हो रही मजदूरों की छंटनी और उत्पादन-डिस्पैच बंद किये जाने पर गहरी चिंता जतायी गयी. बिना नोटिस काम बंद होने से स्थानीय मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. वहीं, प्लांट से कोयला, स्लैग और क्लिंकर अन्य जगहों पर शिफ्ट किये जाने से ग्रामीणों में फैक्ट्री पूरी तरह बंद होने का डर है. समस्या का समाधान निकालने की आस आक्रोशित मजदूरों व ग्रामीणों ने 29 मई को झींकपानी से चाईबासा तक पदयात्रा कर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की थी.
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