Dheeraj Singh
Ranchi : राजधानी के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा ताक पर है. नियमों को ताक में रखकर स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए कमर्शियल वाहनों (पीला नंबर प्लेट) की जगह धड़ल्ले से निजी वाहनों (सफेद नंबर प्लेट) का इस्तेमाल किया जा रहा है. शहर की सड़कों पर एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में ऐसी गाड़ियां रोजाना दौड़ रही है. इस अवैध खेल से जहां बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है. वहीं सरकारी राजस्व को हर महीने लाखों रुपये के टैक्स का चूना लग रहा है. इसके बावजूद रांची जिला प्रशासन और जिला परिवहन कार्यालय मूकदर्शक बने हुए है.

सुरक्षा मानक गायब, रेंट पर चल रही गाड़ियां
स्कूल में चलने वाली गाड़ियों के लिए कई नियम और कानून है. नियमों के मुताबिक, स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों के लिए कड़े दिशा निर्देश तय है. व्यावसायिक (पीला नंबर प्लेट) वाहनों का समय-समय पर फिटनेस टेस्ट होता है. उनके चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन होता है. इसके विपरीत, निजी वाहनों (सफेद नंबर प्लेट) में इन सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है. स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक मिलकर चंद पैसों की बचत के लिए इन नियमों को ठेंगा दिखा रहे है. अभिभावक भी मजबूरी में अपने बच्चों को इन असुरक्षित वाहनों में भेजने को विवश है.
सीधे तौर पर टैक्स की बड़ी चोरी
यह पूरा मामला सीधे तौर पर टैक्स चोरी से जुड़ा है. कमर्शियल वाहनों को सरकार को भारी मात्रा में रोड टैक्स, परमिट फीस और फिटनेस शुल्क देना पड़ता है. व्यावसायिक वाहनों का इंश्योरेंस भी महंगा होता है. निजी वाहन मालिक इन सभी टैक्सों से बचकर सीधे तौर पर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे है. रांची में हर महीने इस अवैध धंधे से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है.

जिला प्रशासन और DTO की चुप्पी पर सवाल
राजधानी में सुबह और दोपहर इन दोनों समयों पर सैकड़ों की संख्या में वाहन दौड़ते हैं. लेकिन रांची जिला प्रशासन और डीटीओ DTO की नजर इन पर नहीं पड़ती. विभाग कभी-कभार दिखावे के लिए जांच अभियान चलाता है, लेकिन सांठ-गांठ के कारण यह खेल सालों से बेखौफ जारी है. कुछ अभिभावकों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही इन अवैध स्कूली वाहनों पर नकेल नहीं कसी, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

DTO ने क्या कहा
इस मामले को लेकर रांची के डीटीओ DTO अखिलेश कुमार ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई कुछ दिनों पहले की गई थी. इसके लिए एक टीम बनाया गया है और जल्द ही फिर कार्रवाई की जाएगी. अभिभावकों को भी इस मामले में ध्यान से सोचना चाहिए और अपने बच्चों को स्कूल के वाहन से छोड़ना चाहिए.
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