Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रेल हादसे में मृत अशोक मेहतो के परिजनों का मुआवजा दावा खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि मृतक एक बोनाफाइड (वैध टिकटधारी) यात्री था और उसकी मौत चलती ट्रेन से गिरने के कारण हुई. जो रेलवे अधिनियम के तहत अनटुवर्ड इंसिडेंट की श्रेणी में आता है. अदालत ने पाया कि मृतक के पास से वैध रेल टिकट बरामद हुआ था और पुलिस की इनक्वेस्ट व जांच रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट था कि उसकी मौत ट्रेन से गिरने के कारण हुई. सिर्फ इस आधार पर कि शव रेलवे ट्रैक से करीब 10 मीटर दूर मिला, मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

दो महीने के भीतर भुगतान करने का आदेश
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रेलवे मुआवजा संबंधी कानून लाभकारी कानून है. इसलिए इसकी संकीर्ण नहीं बल्कि उदार व्याख्या की जानी चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि चलती ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा होना भले ही लापरवाही हो, लेकिन इसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता. अदालत ने रेलवे को निर्देश दिया कि मृतक के आश्रितों को 8 लाख रुपये मुआवजा और 1 अगस्त 2017 (दुर्घटना की तिथि) से भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने के भीतर राशि का भुगतान किया जाए.
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