Ranchi: झारखंड के कृषि क्षेत्र में अब औपचारिकता की जगह परिणाम को प्राथमिकता दी जाएगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में जो तेवर दिखाए हैं, वे साफ संकेत देते हैं कि अब सरकारी योजनाओं की फाइलें फाइलों में दफन नहीं होंगी, बल्कि सीधे खेतों और किसानों की तकदीर बदलेंगी. मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी है, कि किसानों की समृद्धि अब सिर्फ भाषण का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सिर्फ निर्देश नहीं, परिणाम चाहिए
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया, कि सरकार की मंशा साफ है योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुंचना ही चाहिए. उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे पूरी संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ धरातल पर उतरें. खाद, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन इन तीनों के लिए कोई बहाना नहीं चलेगा. निर्धारित समय-सीमा के भीतर किसानों को संसाधन मिलना सुनिश्चित करना अब अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी.
अब नहीं चलेगा पारंपरिक ढर्रा
पलामू प्रमंडल और राज्य के अन्य कम वर्षा वाले क्षेत्रों की बदहाली पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रकृति पर निर्भरता कम करनी होगी. सुखाड़ को देखते हुए विशेष प्रोक्योरमेंट सिस्टम और जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को युद्ध स्तर पर लागू करने का निर्देश दिया. दलहन और मिलेट (मोटे अनाज) की खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए कहा है, ताकि अल्प वर्षा के बावजूद किसानों की आय प्रभावित न हो.
गांव-गांव में’मॉडल कृषक पाठशाला
मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही 57 किसान पाठशालाओं की संख्या को बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता को सुधारने पर जोर दिया है. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक ‘मॉडल कृषक पाठशाला’ का संचालन सुनिश्चित हो. इन पाठशालाओं को केवल इमारत नहीं, बल्कि कृषि विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थाओं के समन्वय से अत्याधुनिक नॉलेज सेंटर बनाया जाएगा, जहां युवाओं को आधुनिक तकनीक आधारित खेती का प्रशिक्षण दिया जा सके. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिलावार ऐसी परती भूमि को चिन्हित करने का टास्क दिया है, जो कृषि योग्य तो है लेकिन खाली पड़ी है. इस भूमि को चिन्हित कर वहां कृषि आधारित गतिविधियों के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा.
किसान समृद्धि योजना और पीएम कुसुम
मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा चालित पंपसेट वितरण की गति तेज करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जरेडा और कृषि विभाग को पीएम कुसुम योजना (PM-KUSUM Scheme) के साथ बेहतर तालमेल बिठाना होगा, ताकि किसान बिजली पर निर्भर न रहें और उनकी आर्थिक बचत सुनिश्चित हो सके.
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बताया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पशुपालन केवल जीविका नहीं, बल्कि व्यवसाय होना चाहिए. उन्होंने मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन और दुग्ध उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाने के निर्देश दिए. जिन माइनिंग क्षेत्रों में कृषि कार्य कम हो गए हैं, वहां किसानों के लिए मुर्गी और बकरी पालन का खास बिजनेस मॉडल तैयार करने पर जोर दिया गया है. राज्य के केन्द्रीय काराओं (जेलों) में भी डेयरी फॉर्म स्थापित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि वहां के कैदी भी उत्पादक कार्यों से जुड़ सकें.
बिचौलियों का खेल अब खत्म
लैम्पस और पैक्स को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इनका आधुनिकीकरण अनिवार्य है. उन्होंने इन्हें सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के रूप में विकसित करने और कंप्यूटरीकरण के माध्यम से बैंकिंग और बीज वितरण नेटवर्क को पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया. एक किसान को बार-बार लाभ देने के बजाय, नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ना अब पैक्स का मुख्य लक्ष्य होगा.
सीधे संवाद से लिया फीडबैक
मुख्यमंत्री केवल मीटिंग रूम में नहीं रुके. उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए गढ़वा के किसान पाठशाला का जायजा लिया और सीधे दुमका के किसान सुरेश मरांडी से बात कर सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी. मुख्यमंत्री ने जामताड़ा के कृषि पदाधिकारी को काजू की खेती पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का भी कड़ा निर्देश दिया.
