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राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण, संवैधानिक गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : राकेश सिन्हा

Ranchi : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मीडिया प्रभारी...

Ranchi : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा और सम्मान बनाए रखना सभी सरकारों और राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है. इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है. राकेश सिन्हा ने कहा कि यदि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल से जुड़ी किसी भी तरह की चूक हुई है, तो उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने.

टकराव की राजनीति से बचना चाहिए : राकेश सिन्हा

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पूरे देश की प्रतिनिधि होती हैं और उनका पद भारतीय संविधान की सर्वोच्च गरिमा का प्रतीक है. इसलिए उनसे जुड़े हर कार्यक्रम में तय प्रोटोकॉल और संवैधानिक परंपराओं का पूरी तरह पालन होना अनिवार्य है. कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी और टकराव की राजनीति से बचना चाहिए. संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. केंद्र और राज्य सरकारों को इस विषय पर परिपक्वता, संयम और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाना चाहिए.

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लोकतांत्रिक संस्थाओं को करें मजबूत : राकेश सिन्हा

राकेश सिन्हा ने कहा कि देश इस समय कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में राजनीतिक दलों को आपसी आरोप-प्रत्यारोप में समय बर्बाद करने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की पक्षधर रही है. हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में सभी पक्ष संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए समाधान निकालेंगे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और देश की सर्वोच्च संस्थाओं की प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहे.

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