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प्रधानमंत्री आवास योजना कोलघटी में त्राहि-त्राहि, पानी-बिजली के लिए भड़का लोगों का गुस्सा

Hazaribagh: प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना, कोलघटी के निवासियों का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन...

Hazaribagh: प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना, कोलघटी के निवासियों का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जी रहे लाभुकों ने निरीक्षण पर आई दिल्ली और रांची की केंद्रीय टीम के समक्ष अपना जोरदार आक्रोश व्यक्त किया. महिलाओं ने अधिकारियों को घेरते हुए साफ कहा “साहब! एक बाल्टी पानी के लिए हाहाकार मचा है, यहाँ हमें बसाकर सरकार और नगर निगम ने ठगने का काम किया है.”

निरीक्षण के दौरान फूटा महिलाओं का गुस्सा

निरीक्षण दल में दिल्ली और रांची से आए विशेषज्ञों के साथ हजारीबाग नगर निगम के सहायक आयुक्त विपिन कुमार एवं अन्य पदाधिकारी शामिल थे. जैसे ही टीम परिसर में पहुंची, महिलाओं ने उन्हें घेर लिया और अपनी समस्याओं की झड़ी लगा दी. एक महिला ने अधिकारियों से तीखा सवाल किया, “जब यहाँ पानी की व्यवस्था थी ही नहीं, तो आवास का निर्माण क्यों कराया गया? नगर निगम और ठेकेदार की मिलीभगत से हमें ठगा गया है.”

स्थिति इतनी विकट है कि कई महिलाओं ने रोते हुए बताया कि एक माह से अधिक समय से उन्होंने ठीक से स्नान तक नहीं किया है. लोग बाहर से ऊंचे दामों पर पानी खरीदकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं. निवासियों का आरोप है कि निगम द्वारा टैक्स तो समय पर वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर “जीरो” परिणाम है.

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बिजली, सड़क और बिलिंग को लेकर भी नाराजगी

सिर्फ पानी ही नहीं, बिजली और सड़क को लेकर भी निवासियों में भारी असंतोष दिखा. लाभुकों ने बताया कि मीटर लगाए हुए लंबा समय बीत गया है, लेकिन मासिक बिल नहीं दिया जा रहा. लोगों को डर है कि एक साथ लाखों का बिल आने पर वे उसका भुगतान कैसे करेंगे? आवास तक पहुंचने वाली सड़कें बदहाल हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, एक साल पहले सड़क का टेंडर हुआ था, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ.

आश्वासन पर भी कायम संदेह

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली, रांची और हजारीबाग के अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को एक सप्ताह के भीतर सभी समस्याओं का समाधान करने का लिखित आश्वासन दिया है. हालांकि, स्थानीय लोग इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे. उनका कहना है कि पहले भी कई बार झूठे वादे किए जा चुके हैं. देखना अब यह है कि इस बार अधिकारियों की फाइलें धरातल पर उतरती हैं या कोलघटी के निवासी इसी तरह बूंद-बूंद पानी और अंधेरे में जीने को विवश रहेंगे.

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