Chakardharpur: कराईकेला स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. पूजा-अर्चना के बाद 201 महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भव्य कलश यात्रा निकाली. गाजे-बाजे, शंखध्वनि और भजन-कीर्तन के बीच निकली यात्रा से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया. कलश यात्रा मंदिर परिसर से निकलकर प्रसिद्ध आहारबांध तालाब पहुंची. वहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना कर कलश में पवित्र जल भरा गया. इसके बाद श्रद्धालु महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पुनः मंदिर पहुंचीं.

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का हुआ महाअभिषेक
सायंकाल पंडित जगदीश चंद्र ठाकुर एवं भरत भूषण मिश्रा ने वैदिक विधि-विधान से भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा का पवित्र जल से महाअभिषेक कराया. स्नान के बाद तीनों विग्रहों को सिंहासन पर विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की गई. पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर-खिचड़ी तथा श्रीसत्यनारायण महाप्रसाद का वितरण किया गया. धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान को खीर-खिचड़ी और खट्टा का भोग अर्पित किया गया. मान्यता के अनुसार देवस्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए उन्हें उपचार एवं विश्राम के लिए अनसर गृह में विराजमान कराया जाता है.

15 दिन बंद रहेगा मंदिर का पट
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि मंगलवार से अगले 15 दिनों तक मंदिर का पट बंद रहेगा और इस दौरान श्रद्धालु भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे. 15 जुलाई को नवयौवन दर्शन एवं नेत्र उत्सव के बाद दर्शन शुरू होंगे. इसके बाद 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. श्री श्री जगन्नाथ पूजा कमिटी 64 मौजा कराईकेला के संरक्षक प्रशांत साहू ने कहा कि देवस्नान पूर्णिमा प्रभु जगन्नाथ की भक्ति और शुद्धिकरण का महापर्व है. उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उनकी कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक सद्भाव बना रहे. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सेवा, प्रेम और आस्था के मार्ग पर चलने का आह्वान किया.
समिति के सदस्यों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर के संरक्षक प्रशांत साहू, तुलसी महतो, विवेक मिश्रा, रूपेश त्रिपाठी, राजेंद्र मेलगांडी, ललित नारायण ठाकुर, गिरधारी मंडल, नितेश मंडल, बाबनाथ सारंगी, दुलाल सेन सहित मंदिर समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
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