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बुंडू के ताऊ मैदान में मुण्डारी खूंटकट्टी पर मंथन, सीएनटी एक्ट की धाराओं पर हुआ गहन विचार-विमर्श

रांची: झारखंड मुंडा समाज के तत्वावधान में ताऊ मैदान, बुंडू में एक दिवसीय मुण्डारी खूंटकट्टी कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की...

रांची: झारखंड मुंडा समाज के तत्वावधान में ताऊ मैदान, बुंडू में एक दिवसीय मुण्डारी खूंटकट्टी कार्यशाला का आयोजन किया गया.  कार्यक्रम की शुरुआत मुण्डा समाज के दिवंगत महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित करने तथा सींग बोंगा गोवारी के साथ हुई.  कार्यशाला में Chotanagpur Tenancy Act, 1908 (सीएनटी एक्ट) की महत्वपूर्ण धाराओं पर गहन विचार-मंथन किया गया. वक्ताओं ने धारा 46 के तहत रैयतों के हक के अंतरण पर प्रतिबंध, धारा 71 में अवैध रूप से निष्कासित भूधारी को पुनः दखल देने का प्रावधान, धारा 83 में खतियान के प्रारंभिक प्रकाशन, संशोधन एवं अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया, धारा 87 में राजस्व पदाधिकारी के समक्ष वाद दायर करने की व्यवस्था, धारा 240 में मुण्डारी खूंटकट्टी काश्तकारी के अंतरण पर रोक और धारा 242 में अवैध दखलकारों के निष्कासन संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की.

समाज को कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक

कार्यशाला में सभापति सह तमाड़ विधायक विकास कुमार मुंडा विशेष रूप से उपस्थित रहे. इसके अलावा शहीद पड़हा राजा सोमा मुंडा की पत्नी अमृता मुंडा, महेंद्र मुंडा (खूंटी), विजय मुंडा (लातेहार), समाजसेवी उदारकांत मुंडा, द्रौपदी मुंडा, महावीर मुंडा, यदुगोपाल मुंडा, सहदेव मुंडा, ठाकुर मनमोहन सिंह, शिव शंकर कांडेयोग तथा Tata Steel Foundation सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे.

वक्ताओं ने कहा कि मुण्डारी खूंटकट्टी व्यवस्था केवल भूमि अधिकार का प्रश्न नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, परंपरा और स्वशासन की मूल पहचान है. जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए समाज को कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है.

ये रहे उपस्थित 

कार्यक्रम के सफल संचालन में हीरा मुंडा, गिरीश मुंडा, आदित्य नाग, अनिल सिंह मुंडा, पूर्णचंद्र मुंडा, मंटू कुमार मुंडा, सुखलाल मुंडा, अनिरुद्ध मुंडा, धनंजय मुंडा, सानिका मुंडा, शिवजन मुंडा, अनीता देवी, उषा मुंडा, हेमलता मुंडा, सुनीता मुंडा, उमेश सिंह मुंडा, रामधन मुंडा, लखन मुंडा, रंजन सिंह मुंडा, कुलपति मुंडा सहित मुण्डा समाज के कई कार्यकर्ता सक्रिय रूप से उपस्थित रहे.

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक संकल्प लिया गया कि समाज की परंपरागत व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. कार्यक्रम को सफल बनाने में टाटा स्टील फाउंडेशन का अहम भूमिका रहा.

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