Gumla: नगर भवन, गुमला में बुधवार को जिला स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो एवं विशिष्ट अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा सहित अन्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया.

कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से आए लगभग 550 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. साथ ही कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, कृषि सेवा विस्तार कर्मी एवं विभिन्न संबंधित विभागों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे.
विभिन्न विभागों ने प्रस्तुत की वार्षिक और आकस्मिक कार्ययोजना
कर्मशाला के दौरान कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, बागवानी विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, मत्स्य विभाग, डेयरी विभाग एवं जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक द्वारा आगामी वर्षों के लिए किसानों के हित में तैयार की गई विभागीय वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई.
इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों द्वारा जिले के लिए आकस्मिक योजना (Contingency Plan) भी तैयार कर प्रस्तुत किया गया, ताकि मौसमीय परिवर्तन एवं प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को समय पर सहयोग उपलब्ध कराया जा सके.
फसलों की सुरक्षा और KCC को लेकर दी गई जानकारी
मौसम में हो रहे बदलाव एवं बढ़ती गर्मी को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को गर्म हवा एवं गर्म तरंग से फसलों एवं पौधों को सुरक्षित रखने के संबंध में महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी गई. तकनीकी सत्र में खरीफ फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान तथा उसके रोकथाम एवं बचाव के उपायों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई.
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक द्वारा किसानों को आश्वस्त किया गया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने में किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होने दी जाएगी तथा किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा.

समेकित खेती अपनाने की सलाह
अध्यक्ष जिला परिषद, गुमला किरण माला बाड़ा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की मेहनत एवं तपस्या समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला है. उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने का आह्वान किया.
उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो ने किसानों को कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार एवं आय सृजन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि सतत आय सुनिश्चित करने के लिए फसल उत्पादन के साथ-साथ मुर्गी पालन, गोपालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन, बागवानी एवं सब्जी उत्पादन जैसे समेकित कृषि मॉडल को अपनाना आवश्यक है.

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जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
उपायुक्त ने जल संरक्षण एवं सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से जल स्रोतों के प्रबंधन हेतु कार्ययोजना तैयार कर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि योजनाबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा सके.
उन्होंने कृषि विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को किसानों की सतत सेवा एवं सहायता के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने तथा सौंपे गए दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
