News Wave Desk: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आधी रात को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. अचानक जमीन हिलने से अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल गए. हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक कहीं से जान-माल के नुकसान होने की कोई सूचना नहीं मिली है.
भूकंप की तीव्रता 4.2 मैग्नीट्यूड
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिले में भूकंप के झटके रविवार और सोमवार की रात करीब 1 बजकर 21 मिनट 34 सेकंड पर महसूस किए गए. भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.2 मैग्नीट्यूड मापी गई, जिसका केंद्र जिले के बड़कोट क्षेत्र के राजगढ़ जंगलों में लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित पाया गया. बता दें, भूकंप के झटकों का असर सिर्फ उत्तरकाशी तक ही सीमित नहीं रहा. पड़ोसी जिला टिहरी गढ़वाल में भी भूकंप के हल्के कंपन दर्ज किये गए. टिहरी में भूकंप की तीव्रता 2.0 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई.
कई तहसीलों में हल्के झटकों की पुष्टि
उत्तरकाशी जिले के कई हिस्सों बड़कोट, पुरोला, मोरी, चिन्यालीसौड़, डुंडा समेत पूरी यमुना घाटी में लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए. आधी रात को अचानक मकान हिलने से लोग घबरा गए और दो-तीन मंजिला इमारतों में रहने वाले लोग सुरक्षा के लिए अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए. प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सभी तहसीलों से संपर्क किया गया है और फिलहाल किसी प्रकार के नुकसान होने की सूचना नहीं है. स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ी चिंता, 49 स्थान संवेदनशील घोषित
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों के 49 स्थानों को संभावित आपदा प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है. यह कदम धराली जैसी प्राकृतिक घटनाओं की दोबारा आशंका को देखते हुए उठाया गया है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इन सीमावर्ती पहाड़ी जिलों में मलबा बहने (डेब्रिस फ्लो) के खतरे का विस्तृत अध्ययन कराया. जांच में इलाके की भौगोलिक स्थिति, पुराने भूस्खलन के निशान, ग्लेशियर, पानी के बहाव के रास्ते, आबादी और सड़कों की स्थिति का गहराई से आकलन किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, चिन्हित 49 स्थानों में से 11 स्थानों को हाई रिस्क, 30 स्थानों को मीडियम रिस्क और 8 स्थानों को कम रिस्क श्रेणी में रखा गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में इन क्षेत्रों में तेज मलबा बहाव होने पर भारी नुकसान हो सकता है. ऐसे में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन द्वारा संबंधित जिलाधिकारियों को इन स्थानों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने, वास्तविक स्थिति की जांच करने और खतरा कम करने के उपायों के साथ विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं.
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