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EXCLUSIVE : झारखंड पुलिस की बढ़ी सख्ती तो छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शिफ्ट हो गए तस्कर,पढ़े पुलिस मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट

Dheeraj Kumar Ranchi : झारखंड सरकार और प्रदेश पुलिस की ओर से राज्य में ड्रग्स के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए...

अफीम की खेती
सांकेतिक तस्वीर

Dheeraj Kumar

Ranchi : झारखंड सरकार और प्रदेश पुलिस की ओर से राज्य में ड्रग्स के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों का असर दिखने लगा है. पुलिस की लगातार कार्रवाई और अफीम की खेती के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के कारण तस्करों में खौफ का माहौल है. पिछले दो अफीम फसलीय वर्षों के दौरान राज्य में बड़े पैमाने पर अफीम की लहलहाती फसलों को नष्ट किया गया. पुलिस की इस चौतरफा सख्ती का नतीजा यह हुआ कि अब अफीम की खेती करने वाले और इसके तस्कर झारखंड छोड़कर पड़ोसी राज्यों में अपना नया ठिकाना ढूंढ रहे हैं. झारखंड पुलिस मुख्यालय के उच्च अधिकारियों को मिली ताजा जानकारियों के अनुसार, अफीम तस्करों ने अब छत्तीसगढ़ का रुख करना शुरू कर दिया है.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने झारखंड पुलिस मुख्यालय को भेजी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ पुलिस ने हाल ही में झारखंड पुलिस मुख्यालय को एक खुफिया रिपोर्ट भेजी है. छत्तीसगढ़ पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के तस्करों ने छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुछ दुर्गम इलाकों में स्थानीय लोगों की मदद से अफीम की खेती शुरू करवायी थी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब बलरामपुर जिला पुलिस को 11 मार्च को खजूरिया और तूरीपानी गांवों के इलाकों में अफीम की अवैध खेती होने की गुप्त सूचना मिली. सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बलरामपुर पुलिस ने करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की अफीम की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया. इस मामले में पुलिस ने साधुर गागेशिया नामक एक स्थानीय व्यक्ति और उसके एक अन्य सहयोगी को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी साधुर गागेशिया ने पुलिस पूछताछ में कबूला कि झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले भूपेंद्र उरांव ने उसे मोटी कमाई और ज्यादा पैसा कमाने का लालच दिया था. जिसके बाद उसने अपने खेतों में अफीम की फसल उगाई थी.

पहले बाहर के लोग फंसाते थे, अब झारखंड के तस्कर सक्रिय

अफीम नेटवर्क की पुरानी कड़ियों की जांच में यह बात सामने आई थी कि पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और नेपाल जैसे राज्यों व देशों के बड़े तस्कर झारखंड आते थे. वे यहां के भोले-भाले ग्रामीणों और आदिवासियों को पैसों का प्रलोभन देकर उनसे अफीम की खेती करवाते थे. लेकिन अब झारखंड पुलिस की कड़ाई के कारण ट्रेंड बदल गया है और खुद झारखंड के स्थानीय लाइनर व तस्कर दूसरे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में जाकर नेटवर्क फैला रहे हैं.

झारखंड के आठ प्रमुख जिलों को अफीम की खेती के लिये संवेदनशील माना जाता है

  •  चतरा
  • खूंटी
  •  लातेहार
  • रांची
  • पलामू
  • चाईबासा
  • सरायकेला
  • हजारीबाग

पुलिस इन इलाकों में न सिर्फ फसलों को नष्ट कर रही है, बल्कि पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त निरोधात्मक कार्रवाई भी कर रही है. जिससे तस्करों के मंसूबे लगातार विफल हो रहे हैं.

पूर्व के रिकॉर्ड बताते हैं कि अफीम की खेती के खिलाफ पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

  • 2021-2022 : 2,871.02 एकड़
  •  2022-2023 : 5,494.10 एकड़
  •  2023-2024 : 4,853.99 एकड़
  • 2024-2025 : 27,000.00 एकड़
  •  2025- 2026 : 37000 एकड़

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