Saraikela : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी की गज परियोजना क्षेत्र से हाथी बाहर निकल आये है. इन हाथियों का झुंड इन दिनों ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के ईचागढ़, कुकडू और नीमडीह प्रखंड के छोटे-बड़े जंगलों में डेरा डाले हुए है. शाम ढलते ही झुंड गांवों में प्रवेश कर उपद्रव मचाने लग रहा है. इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बनी हुई है.
हाथी बंगाल के या झारखंड के
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये हाथी झारखंड के हैं या पश्चिम बंगाल के, इसकी पहचान ही नहीं हो पा रही. दोनों राज्य के वन विभाग एक-दूसरे पर दायित्व डालकर ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं. आम नागरिक सवाल कर रहे हैं कि हाथी की झुंड तो मौजूद है, पर पहचान झारखंड और बंगाल दोनों के पास नहीं है.

चांडिल से होते हुए अयोध्या पहाड़ की तरफ गये हाथी
बीते रात दोनों राज्यों की सीमावर्ती क्षेत्र में हाथी देखे गए. पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बागामुंडी माठा वन क्षेत्र के अयोध्या पहाड़ में हाथी का झुंड था. उसे झारखंड के सरायकेला-खरसावां के चांडिल वन क्षेत्र की सीमा से होते अयोध्या पहाड़ जाने से दोनों राज्यों की एलिफेंट ड्राइव टीम ने रोकने का प्रयास किया. ऐसी घटनाओं से ग्रामीणों की समस्या बढ़ गयी है.
चांडिल डैम बना अभिशाप
वनरक्षी वशिष्ठ नारायण के अनुसार वन्य जीव की प्रकृति से छेड़छाड़ दंडनीय अपराध है, लेकिन विस्थापित ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के विपरीत काम करने को मजबूर होना पड़ता है. उनका कहना है कि हाथी समस्या का सबसे बड़ा कारण चांडिल डैम है. बहु-उद्देशीय परियोजना के नाम पर बना डैम आज तक कोई उद्देश्य पूरा नहीं कर पाया. उल्टे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र को विस्थापन और हाथी समस्या विरासत में मिली है, जो अब जनसरोकार नहीं बल्कि चुनावी मुद्दा बन गई है.
वन विभाग की चेतावनी
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हाल में चेतावनी जारी की है कि हाथियों के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. किसी वन अधिकारी से दुर्व्यवहार करने पर भी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि दोनों राज्य मिलकर हाथियों की पहचान, मॉनिटरिंग और पलायन मार्ग तय करें, ताकि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें.


