Saurav Singh
Ranchi : झारखंड के प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था के इतिहास में ऐसे कई मौके आए, जब कर्तव्य में लापरवाही बरतने या विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने पर सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है. राज्य में अपराध नियंत्रण में विफलता और सुरक्षा में चूक को लेकर केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर ही नहीं, बल्कि एसएसपी SSP, एसपी SP और डीसी DC जैसे शीर्ष अधिकारियों पर भी गाज गिरी है. वर्तमान और तात्कालिक मुख्यमंत्रियों के आदेश पर इन अधिकारियों को न सिर्फ पदों से हटाया गया, बल्कि कई मामलों में उन्हें निलंबित तक किया गया है. आइए डालते है झारखंड के इतिहास की ऐसी ही चार बड़ी और चर्चित प्रशासनिक कार्रवाइयों पर एक नज़र.

करणी सेना नेता हत्याकांड : जमशेदपुर SSP और सरायकेला SP पर गिरी गाज
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित ‘डबल डाउन बार’ के बाहर पार्किंग क्षेत्र में करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे. घटना के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक जुलाई की देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया. जमशेदपुर के एसएसपी SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला की एसपी SP निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी साझा की थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी SSP और सरायकेला के एसपी SP को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण हटाया गया है. दोनों को पदमुक्त कर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था.
पुष्पा महतो हत्याकांड : थाना प्रभारी सहित 28 पुलिसकर्मी निलंबित, बोकारो SP का भी तबादला
बोकारो जिले के पिंडाराजोरा थाना क्षेत्र से 21 जुलाई 2025 को 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी. पुलिस की शुरुआती सुस्ती के बाद यह मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया. आखिरकार, 12 अप्रैल 2026 को मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो की निशानदेही पर चाकुलिया पंचायत के मधुटांड़ जंगल से युवती का कंकाल बरामद किया गया. इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस की घोर लापरवाही उजागर होने पर चौतरफा कार्रवाई हुई. शुरुआती तौर पर थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया. मामला यहीं शांत नहीं हुआ. जांच की आंच वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची और सरकार ने 17 अप्रैल को बोकारो के एसपी SP को पद से हटा दिया. इसके साथ ही क्षेत्र के आईजी IG और डीआईजी DIG का भी तबादला कर दिया गया.
खरसावां शहीद पार्क में सुरक्षा चूक : IPS संजीव कुमार को 26 दिनों में ही गंवाना पड़ा था पद, DC भी हटाए गए
एक जनवरी 2017 को खरसावां शहीद पार्क में एक कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला सामने आया था. मुख्यमंत्री की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर हुई इस चूक को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया. इस मामले की उच्च स्तरीय जांच तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, गृह सचिव एसकेजी रहाटे और डीजीपी DGP डीके पांडेय की समिति ने की थी. जांच रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद सरायकेला-खरसावां के तत्कालीन डीसी DC के. श्रीनिवासन और एसपी SP संजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया था. इस कार्रवाई में सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि 2009 बैच के आईपीएस IPS अधिकारी संजीव कुमार ने 6 दिसंबर 2016 को ही जिला में एसपी SP का पदभार संभाला था. सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक के कारण उन्हें कमान संभालने के महज 26 दिनों के भीतर ही अपने पद से हाथ धोना पड़ा था.
राजनगर मॉब लिंचिंग : फोन न उठाने और देरी से पहुंचने पर DC और SP हुए थे सस्पेंड
19 मई 2017 को सरायकेला के राजनगर थाना क्षेत्र में बच्चा चोर गिरोह की एक अफवाह ने हिंसक रूप ले लिया था.उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के चार लोगों की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी थी. घटना के दौरान स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि लगातार जिले के डीसी DC और एसपी SP को फोन कर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन अधिकारियों ने फोन नहीं उठाए और न ही समय पर पुलिस बल भेजा. दोनों अधिकारी वारदात होने के करीब 6 घंटे की देरी से घटनास्थल पर पहुंचे थे. प्रशासन द्वारा पहले से जारी सतर्कता आदेशों की अनदेखी और कर्तव्यहीनता के आरोपों की जांच तत्कालीन कोल्हान आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार और डीआईजी DIG ने की. जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 9 जून 2017 को सरायकेला के डीसी DC रमेश सी. घोलप और एसपी SP राकेश बंसल को निलंबित कर मुख्यालय अटैच कर दिया था. उस दौरान प्रशासनिक शून्यता को भरने के लिए तत्काल प्रभाव से डीडीसी DDC आकांक्षा रंजन को डीसी DC का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था.


