Ranchi: झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच के सब इंस्पेक्टर अनुपम कच्छप हत्याकांड में एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने पुलिस की जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले वर्ष कांके में हुई इस हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है.
केस डायरी बनी विवाद की वजह
जमानत मिलने के पीछे का सबसे बड़ा कारण पुलिस की वह अजीबो-गरीब कहानी बताई जा रही है, जिसे उन्होंने केस डायरी में दर्ज किया है. पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई केस डायरी के मुताबिक हत्याकांड की जांच के दौरान एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम हुआ.

जंगल में हुई घटनाक्रम की कहानी
पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई डायरी में लिखा गया है कि पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थी. छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मी जब बुरी तरह थक गए तो वे जंगल में एक जगह बैठकर आराम करने लगे. डायरी के मुताबिक जब पुलिस वाले थककर यह सोच रहे थे कि अब आगे क्या किया जाए और आरोपी कहां मिलेंगे, तभी अचानक एक व्यक्ति जंगल के बीच से उनकी ओर आता दिखाई दिया.
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आरोपी की गिरफ्तारी और दावा
पुलिस को सामने देख वह व्यक्ति भागने लगा, जिसे जवानों ने खदेड़कर पकड़ लिया. पुलिस का दावा है कि पकड़े गए व्यक्ति से जब जंगल में ही पूछताछ की गई और उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक अवैध हथियार और अलग-अलग बोर की कई गोलियां बरामद हुईं. उस व्यक्ति ने अपना नाम भोला उर्फ मनोहर बताया और खुद को इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी स्वीकार किया.
कानूनी विशेषज्ञों में हैरानी
इस पूरी कहानी ने कानूनी विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. केस डायरी देखकर सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक इत्तेफाक था कि जिस वक्त पुलिस जंगल में आराम कर रही थी, मुख्य आरोपी खुद चलकर उनके पास आ गया.
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
एक सब इंस्पेक्टर की हत्या जैसे संवेदनशील मामले में क्या पुलिस की जांच केवल किस्मत और इत्तेफाक पर टिकी थी. बिना किसी ठोस इंटेलिजेंस या घेराबंदी के जंगल में अचानक यह घटना हुई कैसे.
कमजोर पड़ती पुलिस की दलील
शुरुआत में पुलिस ने दावा किया था कि अनुपम कच्छप की हत्या डीजल चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह ने की है. पुलिस ने कई लोगों को सलाखों के पीछे भेजा था. लेकिन अब केस डायरी में दर्ज इस फिल्मी कहानी के कारण पुलिस की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
जमानत से बढ़े सवाल
आरोपियों को जमानत मिलना पुलिस की लचर पैरवी और कमजोर साक्ष्यों की ओर इशारा करता है.
