रितिक कुमार
Ranchi: रांची सिविल कोर्ट ने हत्या के आरोपी शिवचरण मुंडा को बरी कर दिया है. ट्रायल के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष और पुलिस शिवचरण के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे. कोर्ट के इस फैसले के बाद पिछले तीन वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे बंद शिवचरण मुंडा की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.

2023 में दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा मामला साल 2023 का है. रांची के दशम फॉल थाना क्षेत्र में अमित महतो नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पुलिस ने मृतक के ही दोस्त शिवचरण मुंडा को मुख्य आरोपी बनाते हुए उसके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी और त्वरित कार्रवाई का दावा करते हुए घटना के कुछ ही दिनों बाद शिवचरण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.
तीन साल जेल में बिताने पड़े
शिवचरण मुंडा पर अपने ही दोस्त की हत्या जैसा गंभीर आरोप लगा था, जिसके कारण उसे जमानत नहीं मिल सकी और उसे पिछले तीन साल जेल में बिताने पड़े. अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि शिवचरण ने वह अपराध किया ही नहीं था, जिसके लिए उसे इतने लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी.
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बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील सूरज किशोर प्रसाद ने अदालत के सामने दलील दी कि पुलिस ने शिवचरण को महज संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया था और उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद नहीं है.
साक्ष्य को अदालत ने माना नाकाफी
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयानों को सुनने के बाद यह माना कि पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य कानून की नजर में नाकाफी हैं.
जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर पुलिसिया तफ्तीश और कानूनी प्रक्रिया की लंबी अवधि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक निर्दोष व्यक्ति को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अपनी जिंदगी के तीन बेशकीमती साल जेल में गंवाने पड़े. शिवचरण को ऐसे अपराध के लिए जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा, जो उसने किया ही नहीं था.
