Hazaribagh: नगर निगम क्षेत्र में जल-स्रोतों, जलाशयों और नदी-नालों पर भू-माफियाओं के अवैध कब्जे का एक ऐसा खतरनाक मकड़जाल सामने आया है, जो आने वाले समय में पूरे शहर को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा सकता है. इस घोटाले और अतिक्रमण के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता मनोज गुप्ता ने सीधे मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने उच्चतम न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशों और मुख्यमंत्री के हालिया दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उपायुक्त के जन शिकायत कोषांग में एक बेहद चौंकाने वाला और साक्ष्यों से भरा आवेदन सौंपा है. इस ‘लेटर’ के बाद जिला प्रशासन तुरंत रेस हो गया है और चार बड़े अधिकारियों को तत्काल जांच और कार्रवाई का जिम्मा सौंप दिया है.
378 एकड़ का छड़वा डैम: फर्जी कागजात बनाकर बेच दी सरकारी जमीन
इस पूरे खेल का सबसे स्याह पहलू शहर की जीवनदायिनी कहे जाने वाले ‘छड़वा डैम’ से जुड़ा है. साल 1954 में जब हजारीबाग की आबादी महज 30 हजार थी, तब शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए 378 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर इस डैम का निर्माण कराया गया था. आज आबादी बढ़कर 3 लाख से अधिक हो चुकी है, लेकिन जलापूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भू-माफियाओं ने सरकारी तंत्र की नाक के नीचे इस डैम के एक बहुत बड़े भूभाग का फर्जी कागजात (डीड) तैयार कर लिया और उसे धड़ल्ले से प्लॉटिंग करके बेच दिया. वर्तमान में इस पूरे डैम की आधिकारिक मापी कराकर इसे कब्जा मुक्त कराने और इसका गहरीकरण करने की सख्त जरूरत है.

17 साल पहले हाई कोर्ट का आदेश, फिर भी 50 फीट का नाला सिकुड़कर हुआ 10 फीट
भू-माफियाओं की दुस्साहस की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. रोमी-पेलावल से शुरू होकर शिवपुरी, रामनगर और कुम्हारटोली होते हुए खिरगांव श्मशान के पास नदी में मिलने वाले शहर के मुख्य नाले का वजूद ही मिटा दिया गया है. जो नाला कभी 50 फीट चौड़ा हुआ करता था, उसे चारों तरफ से अतिक्रमण कर महज 10 फीट की संकरी नाली में तब्दील कर दिया गया है. नतीजा यह है कि हर बरसात में नाले का गंदा और दूषित पानी सैकड़ों घरों में घुस जाता है और लोगों का जीवन नर्क बन जाता है. इस मामले में मनोज गुप्ता द्वारा वर्ष 2009 में ही झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL No. – 6711/2009) दायर की गई थी. कोर्ट का आदेश होने के बावजूद 17 वर्षों से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब इस नाले को मुक्त कराकर गार्डवाल बनाने की मांग की गई है. यही हाल सलगांवा के गोंदा डैम से निकलने वाली नदी का भी है, जहां सरकारी अमीन द्वारा अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किए जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं.
निगम के 22 तालाबों की दुर्दशा: एनजीटी के आदेशों को भी ठेंगा
हजारीबाग नगर निगम के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक 22 तालाब भी अब भू-माफियाओं के कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रहे हैं. आरोप है कि नगर निगम इन तालाबों के संरक्षण के नाम पर केवल धन उगाही की योजनाएं बनाता है, धरातल पर कोई नीति नहीं है. आंकड़ों के अनुसार, 7.50 एकड़ में फैले ‘धोबिया तालाब’ के दो एकड़ हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है, जिस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी नगर निगम मौन रहा. इसी तरह 13.50 एकड़ का ओकनी तालाब और 10.80 एकड़ का कस्तूरीखाप तालाब भी आधा से ज्यादा अतिक्रमण की चपेट में है. मनोज गुप्ता ने इन सभी 22 तालाबों की पूरी सूची और सबूतों का पुलिंदा उपायुक्त सहित नगर आयुक्त और महापौर को सौंप दिया है.
प्रशासन का बड़ा एक्शन: चार बड़े अधिकारियों की घेराबंदी शुरू
मनोज गुप्ता के इस आवेदन पर उपायुक्त के जन शिकायत कोषांग ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अंचल अधिकारी (सदर), अंचल अधिकारी (कटकमसांडी), अंचल अधिकारी (कटकमदाग) और नगर आयुक्त को तत्काल पत्र जारी कर दिया है. इन सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और चिह्नित किए गए सभी अतिक्रमणकारियों पर कानूनी डंडा चलाते हुए जल-स्रोतों को पूरी तरह मुक्त कराएं. अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासनिक अमला भू-माफियाओं के इस तिलस्म को तोड़ पाता है या हजारीबाग की जनता को पानी के इस संकट से जूझना ही पड़ेगा.
AlsoRead:रांची : आगजनी के बाद जागता है नगर निगम, कई भवन और संस्थान जोखिम में, फिर भी कार्रवाई नहीं


