Ranchi: झारखंड को कुष्ठ मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है. कुष्ठ रोग को लेकर अब सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्लीनिक, कॉर्पोरेट अस्पताल, पैथोलॉजी लैब और आयुष चिकित्सकों को भी कुष्ठ के हर एक मरीज की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा. सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़ों को कम करना नहीं, बल्कि राज्य को पूरी तरह कुष्ठ मुक्त बनाना है. इसे दो चरणों में परिभाषित किया गया है. अगले 5 वर्षों तक बच्चों में कुष्ठ का एक भी स्वदेशी मामला न मिले. उसके अगले 3 वर्षों तक पूरे राज्य में कुष्ठ का केस शून्य हो जाए.
निजी क्षेत्रों पर रहेगी पैनी नजर
सभी चिकित्सा संस्थानों को हर महीने की 5 और 20 तारीख तक सिविल सर्जन को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट भेजनी होगी.हर संस्थान को एक निर्धारित रजिस्टर बनाना होगा जिसमें मरीजों का पूरा विवरण दर्ज होगा. बीमारी के निदान के दो सप्ताह के भीतर सूचना देना अनिवार्य होगा.
मरीजों को क्या होगा लाभ
- मुफ्त एमडीटी उपचार और फॉलो-अप मिलेगा.
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस दवा दी जाएगी ताकि संक्रमण की चेन टूटे.
- विकलांगता की स्थिति में विशेष देखभाल और पुनर्वास की सुविधा मिलेगी.
- ड्रग रेजिस्टेंट (दवा बेअसर होना) मामलों की पहचान और सटीक इलाज संभव हो सकेगा.
डिजिटल होगा डेटा
स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगा, जहां डेटा का संग्रहण और विश्लेषण किया जाएगा. इससे राज्य के किन हिस्सों में कुष्ठ का प्रकोप ज्यादा है, वहां अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी.
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