Hazaribagh: जैसे तापमान बढ़ रहा है,वैसे-वैसे हजारीबाग के गांवों में पानी का संकट गहराता जा रहा है.हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जिन जलमीनारों से कभी लोगों की प्यास बुझती थी,आज वही ढांचे खामोश खड़े हैं- बिना पानी, बिना देखभाल और बिना जवाबदेही के.जिले के कई पंचायतों में बीते करीब एक साल से पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. जलमीनारें ठप पड़ी हैं, चापानल खराब पड़े हैं और जिम्मेदार महकमा अब तक मूकदर्शक बना हुआ है. न विभाग की सक्रियता दिख रही है, न ही जनप्रतिनिधियों की कोई ठोस पहल.
जिलेभर के सैकड़ों गांवों में लगे चापानल लंबे समय से खराब
इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है.जिलेभर के सैकड़ों गांवों में लगे चापानल लंबे समय से खराब पड़े हैं.नल से जुड़े जलमीनार भी महीनों से बंद हैं.हजारों घरों की आबादी इन जलस्रोतों पर निर्भर थी,लेकिन अब लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं.विभिन्न पंचायतों में मुखिया मद से लगाए गए जलमीनार पिछले करीब डेढ़ साल से निष्क्रिय पड़े हैं.टंकियों में पानी नहीं है और ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ रहा है.
गंभीर समस्या को लेकर खबरें लगातार पर जनप्रतिनिधियों बेखबर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर खबरें लगातार सामने आ रही हैं,लेकिन जनप्रतिनिधियों का ध्यान अब तक इस ओर नहीं गया है. सरकार भले ही “हर घर जल” जैसी योजनाओं की सफलता के दावे कर रही हो,लेकिन हजारीबाग के कई प्रखंडों के गांवों की हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. आज भी यहां लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
अब सवाल यह है-खिर कब टूटेगी यह खामोशी? कब जागेगा सिस्टम? और कब इन सूखी टंकियों में फिर से पानी की धार बहेगी ?
