Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) के मानवविज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को विश्व जनजाति दिवस की पूर्व संध्या पर आर्यभट्ट सभागार में समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. जॉनी रूफीना तिर्की ने की.

जनजातीय समाज ही मुख्यधारा का हिस्सा: डॉ. विकास कुमार
मुख्य अतिथि छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ. विकास कुमार ने कहा कि जनजातीय समाज को मुख्यधारा से अलग नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी मिलकर वर्तमान समाज का निर्माण करते हैं और जनजातीय समुदाय को अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने का अधिकार है.

झारखंड की सामाजिक समरसता पर जोर
डॉ. जॉनी रूफीना तिर्की ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज के प्रति सही समझ विकसित करना है. डॉ. गंगानाथ झा ने बताया कि झारखंड की 27–28 प्रतिशत आबादी जनजातीय है और राज्य में 32 जनजातीय समूह हैं.

आदिवासी ज्ञान और संस्कृति पर चर्चा
वक्ताओं ने जनजातीय इतिहास, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, औषधीय परंपराओं और सामूहिक जीवन शैली के महत्व पर प्रकाश डाला. डॉ. ममता कश्यप ने जनजातीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता बताई, जबकि डॉ. विनोद रंजन ने वर्ष 2026 के विश्व जनजाति दिवस की थीम “स्वदेशी दाइयों को सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा” पर चर्चा की.
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