Hazaribagh: शहरवासियों को स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2017 में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए मॉड्यूलर टॉयलेट आज बदहाल स्थिति में हैं. नगर निगम द्वारा सदर अस्पताल, सरकारी बस स्टैंड, गांधी मैदान समेत कई स्थानों पर लगाए गए अधिकांश टॉयलेट रखरखाव के अभाव में उपयोग के लायक नहीं बचे हैं.
2017 में हुए थे स्थापित
14वें वित्त आयोग की राशि से स्थापित प्रत्येक मॉड्यूलर टॉयलेट पर करीब 2.79 लाख रुपये खर्च किए गए थे. इनका उद्देश्य आम लोगों, महिलाओं, बुजुर्गों और यात्रियों को बेहतर सुविधा देना था.
गंदगी और अव्यवस्था
अधिकांश टॉयलेटों में नियमित सफाई नहीं होती, कई जगह पानी की व्यवस्था बंद है और कई शौचालय टूट-फूट के कारण बंद पड़े हैं. खराब स्थिति के कारण लोग इनका उपयोग करने से बच रहे हैं.सार्वजनिक शौचालयों की खराब हालत का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बाहर से आने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में दूसरी जगहों का सहारा लेना पड़ता है.
महापौर ने दिए कार्रवाई के संकेत
महापौर अरविंद कुमार ने कहा कि मॉड्यूलर टॉयलेटों की स्थिति का निरीक्षण कराया जाएगा. लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी और नियमित सफाई व रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा.
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स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने सभी मॉड्यूलर टॉयलेटों की मरम्मत, नियमित सफाई, पानी की व्यवस्था और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि सार्वजनिक धन से बनी इस सुविधा का लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके.
