Chatra: स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला परिवहन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है. इसी क्रम में कुल्लू मोड़ के पास विभिन्न स्कूलों की बसों की जांच की गई. जांच के दौरान चार मिनी बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाते हुए पाया गया. इस लापरवाही ने स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्षमता से अधिक बच्चे मिले सवार
जांच के दौरान कुल पांच स्कूल बसों की जांच की गई. इनमें चार मिनी बसों में तय क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल ले जाया जा रहा था. विभाग का कहना है कि क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
कई स्कूलों के वाहनों की हुई जांच
परिवहन विभाग की जांच में कई वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और परमिट से जुड़ी कमियां सामने आईं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेजों के स्कूल वाहनों का संचालन बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता है.
सुरक्षा उपकरणों की भी हुई जांच
वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, आपातकालीन निकास, जीपीएस, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी और खिड़कियों में सुरक्षा जाली जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भी जांच की गई. कई वाहनों में इन सुरक्षा मानकों की कमी पाई गई, जिससे विभाग ने गंभीर चिंता जताई.
बच्चों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह रहा कि चार मिनी बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था. ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाना केवल वाहन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और नियमों के अनुरूप परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है.
परिवहन विभाग का स्पष्ट संदेश
जिला परिवहन विभाग ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी स्कूल प्रबंधन को अपने वाहनों के फिटनेस, बीमा, परमिट, प्रदूषण प्रमाणपत्र और सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करनी होगी. साथ ही किसी भी वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत
कुल्लू मोड़ पर हुई जांच में चार मिनी बसों में क्षमता से अधिक बच्चों का पाया जाना सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मासूम जिंदगियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है. अब जरूरत है कि परिवहन विभाग केवल जांच तक सीमित न रहे, बल्कि जिले के सभी स्कूल वाहनों की नियमित जांच कर नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे. स्कूल प्रबंधन भी समझें कि बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. एक बच्चे की जिंदगी से बढ़कर कोई सुविधा, लापरवाही या मुनाफा नहीं हो सकता.
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